रायगढ़/छत्तीसगढ़ (रोहित तिर्की)। खम्हार-पुटूकछार मार्ग में पड़ने वाली नदी बारिश के दिनों में आसपास के ग्रामीणों के लिए बड़ी परेशानी का कारण बन जाती है। वर्षा होते ही नदी का जलस्तर बढ़ जाता है और पानी पुलिया/रपटा मार्ग के ऊपर से बहने लगता है। ऐसी स्थिति में इस मार्ग से आवागमन पूरी तरह या काफी हद तक बाधित हो जाता है। इसका सबसे ज्यादा असर स्कूली छात्र-छात्राओं, बुजुर्गों, महिलाओं, मजदूरों और मरीजों पर पड़ता है।

बारिश के दौरान नदी में जलभराव होने से स्कूल जाने वाले बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है। कई बार बच्चे स्कूल जाने के बजाय घर पर रहने को मजबूर हो जाते हैं, क्योंकि तेज बहाव के बीच नदी पार करना जोखिम भरा होता है। अभिभावकों के सामने भी बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता बनी रहती है।


मरीजों के लिए सबसे गंभीर समस्या

इस मार्ग के बाधित होने का सबसे गंभीर असर उन लोगों पर पड़ता है, जिन्हें इलाज के लिए अस्पताल जाना पड़ता है। किसी व्यक्ति के अचानक बीमार पड़ने, गर्भवती महिला को अस्पताल ले जाने या किसी दुर्घटना अथवा आपात स्थिति में मरीज को तत्काल स्वास्थ्य केंद्र या अस्पताल पहुंचाना हो तो जलभराव के कारण परेशानी बढ़ जाती है। ग्रामीणों का कहना है कि आपात स्थिति में समय सबसे महत्वपूर्ण होता है, लेकिन नदी में पानी भरने के कारण वाहन आगे नहीं जा पाते। ऐसे में मरीज को दूसरे रास्ते से ले जाने की मजबूरी हो सकती है, जिससे अस्पताल पहुंचने में अतिरिक्त समय लग सकता है। बरसात के दिनों में यह समस्या ग्रामीणों के लिए चिंता का विषय बनी रहती है।


वैकल्पिक व्यवस्था से कितना होगा समाधान?

मामला सामने आने के बाद शासन-प्रशासन हरकत में आया है और ग्रामीणों के आवागमन के लिए वैकल्पिक व्यवस्था किए जाने की पहल की जा रही है। यह कदम तत्काल राहत देने की दिशा में महत्वपूर्ण हो सकता है, लेकिन ग्रामीणों के सामने बड़ा सवाल यही है कि क्या वैकल्पिक व्यवस्था बारिश के पूरे मौसम में उनकी समस्या का स्थायी समाधान कर पाएगी? वैकल्पिक मार्ग या अस्थायी व्यवस्था से कुछ समय के लिए आवागमन शुरू हो सकता है, लेकिन यदि हर साल बारिश के दिनों में यही समस्या दोहराती है तो इसका स्थायी समाधान आवश्यक है। ग्रामीणों की मांग है कि समस्या को केवल तत्काल राहत तक सीमित न रखा जाए, बल्कि नदी पर ऐसा पुल बनाया जाए जिससे सामान्य दिनों के साथ-साथ बारिश के मौसम में भी सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित हो सके।


वर्षों से चली आ रही समस्या, स्थायी समाधान की जरूरत

ग्रामीणों का कहना है कि खम्हार-पुटूकछार मार्ग पर नदी में जलभराव की समस्या लंबे समय से बनी हुई है। हर वर्ष बारिश आते ही लोगों को इसी परेशानी का सामना करना पड़ता है। ग्रामीणों के लिए यह केवल आवागमन की समस्या नहीं, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और दैनिक जीवन से जुड़ा गंभीर मुद्दा है। स्कूली बच्चों के अलावा किसान, मजदूर, व्यापारी और रोजमर्रा के काम से आने-जाने वाले लोगों को भी परेशानी होती है। बारिश के दौरान रास्ता बाधित होने से ग्रामीणों को जरूरी काम के लिए अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ सकती है।


DMF की राशि से पुल निर्माण पर उठ रहे सवाल

जिले में जिला खनिज न्यास (DMF) के माध्यम से विभिन्न विकास कार्य किए जाते हैं। ऐसे में ग्रामीणों के बीच यह सवाल भी उठ रहा है कि जब किसी क्षेत्र में लंबे समय से सड़क और पुल जैसी बुनियादी सुविधा की कमी के कारण लोगों को परेशानी हो रही है, तो क्या DMF सहित उपलब्ध विकास मदों की राशि का उपयोग ऐसे आवश्यक और जनहितकारी कार्यों में नहीं किया जाना चाहिए? यदि तकनीकी एवं प्रशासनिक प्रक्रिया के अनुसार इस कार्य के लिए DMF राशि का उपयोग संभव हो, तो संबंधित विभाग द्वारा इसका परीक्षण किया जा सकता है। नदी पर स्थायी पुल बनने से न केवल ग्रामीणों की वर्षों पुरानी समस्या दूर होगी, बल्कि स्कूली बच्चों, मरीजों और आम नागरिकों को सुरक्षित आवागमन की सुविधा भी मिलेगी।


ग्रामीणों को अब सिर्फ आश्वासन नहीं, स्थायी समाधान की उम्मीद

शासन द्वारा वैकल्पिक व्यवस्था की पहल निश्चित रूप से तत्काल राहत की दिशा में एक कदम है, लेकिन ग्रामीण अब इससे आगे की उम्मीद लगाए बैठे हैं। उनकी मांग है कि खम्हार-पुटूकछार मार्ग की नदी पर आधुनिक, मजबूत और सर्वमौसम पुल के निर्माण की दिशा में ठोस पहल की जाए। अब देखना होगा कि शासन-प्रशासन इस समस्या को केवल मौजूदा बारिश के मौसम तक सीमित रखता है या भविष्य में हर साल होने वाली परेशानी को समाप्त करने के लिए स्थायी पुल निर्माण की योजना तैयार करता है। ग्रामीणों को उम्मीद है कि उनकी वर्षों पुरानी समस्या को गंभीरता से लेते हुए शासन उन्हें आधुनिक पुल के रूप में स्थायी विकास की सौगात देगा, ताकि बारिश में न बच्चों की पढ़ाई रुके, न मरीजों को अस्पताल पहुंचने में परेशानी हो और न ही आम ग्रामीणों का आवागमन बाधित हो।