लवकुशनगर,जावेद खान। जिले के लवकुशनगर में तहसीलदार सुप्रिया बागरी पर अधिवक्ताओं द्वारा लगाए गए रिश्वत के आरोपों को लेकर बुधवार को नया मोड़ आ गया। बीते मंगलवार को तहसील कार्यालय के बाहर अधिवक्ताओं ने तहसीलदार और उनके स्टाफ के खिलाफ जमकर नारेबाजी की थी, जिसका वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। अधिवक्ताओं ने आरोप लगाया था कि धारा 151 के मामलों में जमानत के लिए 5 हजार रुपये प्रति जमानत की मांग की जाती है और पैसे न देने पर जमानत नहीं दी जाती।
इन आरोपों के बाद बुधवार को तहसीलदार सुप्रिया बागरी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपनी सफाई पेश की। उन्होंने कहा कि उनके और उनके स्टाफ पर लगाए गए सभी आरोप पूरी तरह निराधार हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि जमानत देना या न देना पीठासीन अधिकारी के विवेक पर निर्भर करता है और यदि किसी को निर्णय पर संदेह है तो वह न्यायालय का सहारा ले सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि उनके फैसले गलत पाए जाते हैं तो न्यायालय उन्हें निरस्त कर सकता है।
तहसीलदार ने अधिवक्ताओं के विरोध को भी अनुचित बताया और कहा कि बिना प्रमाण इस तरह के आरोप लगाना गलत है। उन्होंने दोहराया कि न तो उन्होंने और न ही उनके किसी स्टाफ ने किसी से पैसे की मांग की है। साथ ही उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि यदि कोई व्यक्ति आरोपों के समर्थन में सबूत प्रस्तुत करता है तो संबंधित के खिलाफ सख्त कानूनी और विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
प्रेस वार्ता के दौरान उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पूर्व में क्या होता रहा इसकी उन्हें जानकारी नहीं है, लेकिन उनके कार्यकाल में पारदर्शिता और ईमानदारी से काम किया जाएगा। उन्होंने अपने स्टाफ को सख्त निर्देश दिए हैं कि आम लोगों के कार्यों में किसी प्रकार की देरी न हो और सभी काम निष्पक्षता व जिम्मेदारी के साथ किए जाएं।

