छतरपुर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर समाज की सज्जन शक्ति को साथ लेकर संगठित, समर्थ और समृद्ध भारत निर्माण के संकल्प को लेकर एक प्रमुख जन गोष्ठी का आयोजन महाराजा छत्रसाल बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के जगदीश चंद्र बोस सी.सी. सभागार में किया गया। इस गोष्ठी में मुख्य वक्ता के रूप में जे. नन्दकुमार (अखिल भारतीय संयोजक, प्रज्ञा प्रवाह) उपस्थित रहे, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में विनोद दुबे, जिला संघचालक मंचासीन रहे।


कार्यक्रम में वक्ताओं ने बताया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पिछले लगभग 100 वर्षों से सुसंस्कृत, अनुशासित और राष्ट्र के प्रति समर्पित स्वयंसेवकों का निर्माण करते हुए समाज को संगठित करने का कार्य कर रहा है, जिसका उद्देश्य भारत को परम वैभव तक पहुंचाना है। मुख्य वक्ता जे. नन्दकुमार ने अपने उद्बोधन में कहा कि संघ के शताब्दी वर्ष को केवल उत्सव के रूप में नहीं, बल्कि आत्ममंथन के अवसर के रूप में समझने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि कार्यकर्ताओं को समाज के बीच जाकर संघ के विचारों को पहुंचाना होगा और यह देखना होगा कि अभी कितना कार्य शेष है।


उन्होंने संघ के इतिहास का उल्लेख करते हुए बताया कि केशव बलिराम हेडगेवार द्वारा 1925 में संघ की स्थापना की गई थी, जबकि इससे पहले भी संगठन बिना नाम और औपचारिक संरचना के कार्य करता रहा। सही दिशा और उद्देश्य के कारण संघ निरंतर विस्तार करता गया और आज उसके विचार विश्व स्तर तक पहुंच रहे हैं। अपने संबोधन में उन्होंने स्वामी विवेकानंद के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि राष्ट्र निर्माण के लिए त्याग और सेवा दोनों आवश्यक आधार हैं। उन्होंने कहा कि संगठित समाज ही राष्ट्र को शक्तिशाली बना सकता है और हर व्यक्ति को यह सोचना चाहिए कि देश उसे सब कुछ देता है, लेकिन वह देश को क्या दे रहा है।


नन्दकुमार ने अपने सारगर्भित उद्बोधन में कहा कि भारत का मूल स्वरूप सांस्कृतिक रूप से सशक्त रहा है और समाज के परिवर्तन के लिए व्यक्ति निर्माण अत्यंत आवश्यक है। कार्यक्रम के अंत में उपस्थित जनों की जिज्ञासाओं का समाधान भी उन्होंने किया। इस अवसर पर विभाग प्रचारक शिवेंद्र जी, घुमंतू जाति प्रमुख भालचंद्र जी, सीताशरण अग्निहोत्री सहित संघ एवं समाज के अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।