दतिया। दतिया विधानसभा उपचुनाव के नतीजों के बाद क्षेत्र की राजनीति में मची हलचल थमने का नाम नहीं ले रही है। उपचुनाव में पार्टी प्रत्याशी की हार और भीतरघात की आशंकाओं के चलते भाजपा प्रदेश नेतृत्व द्वारा पूरी जिला कार्यकारिणी भंग किए जाने के बाद अब स्थानीय प्रशासन भी पूरी तरह एक्शन मोड में आ गया है।

प्रशासन ने राजघाट क्षेत्र स्थित सरकारी आवासों पर वर्षों से अवैध कब्जा जमाए बैठे भाजपा नेताओं और सेवानिवृत्त अधिकारियों को बेदखल कर आवास खाली करा लिए हैं। राजनीतिक गलियारों में इस कार्रवाई को पूर्व गृहमंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा के खेमे पर शिकंजा कसने के तौर पर देखा जा रहा है, क्योंकि प्रभावित अधिकांश चेहरे उनके करीबी बताए जा रहे हैं।

उपचुनाव के बाद बदला समीकरण

दतिया विधानसभा उपचुनाव के दौरान टिकट वितरण से लेकर प्रचार तक पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा और उनके समर्थकों की भूमिका लगातार चर्चा में रही थी। चुनाव नतीजों के बाद पार्टी के भीतर बगावत और भितरघात के आरोप खुलकर सामने आए, जिसके चलते संगठन ने तुरंत प्रभाव से जिला इकाई को भंग कर दिया था। इस सियासी फेरबदल के तुरंत बाद प्रशासन द्वारा की गई इस सख्त बेदखली कार्रवाई ने स्थानीय राजनीतिक पारे को और चढ़ा दिया है।

नोटिस के बाद भी नहीं खाली किए गए थे बंगले

कलेक्टर स्वप्निल वानखड़े ने बताया कि राजघाट स्थित ये सरकारी आवास केवल वर्तमान में पदस्थ पात्र कर्मचारियों के लिए आवंटित हैं। जांच में सामने आया कि कई पूर्व अधिकारी व कर्मचारी रिटायरमेंट के बाद भी पिछले 5 से 10 वर्षों से इन पर काबिज थे और कुछ गैर-सरकारी व्यक्ति भी अनधिकृत रूप से रह रहे थे। विधिवत नोटिस दिए जाने के बावजूद जब आवास खाली नहीं किए गए, तब मंगलवार को प्रशासनिक दल ने मौके पर पहुंचकर इन्हें खाली करवाया।

अवैध कब्जों पर जारी रहेगी कार्रवाई

प्रशासन ने दो टूक स्पष्ट किया है कि सरकारी संपत्तियों पर अवैध कब्जा किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। कलेक्टर के अनुसार, यह कार्रवाई पूरी तरह नियमानुसार है ताकि पात्र कर्मचारियों को आवास मुहैया कराया जा सके, और आने वाले दिनों में भी यह अभियान निरंतर जारी रहेगा।