इस्लामाबाद, 21 अप्रैल । पाकिस्तान के सिंध प्रांत में एक नाबालिग हिंदू लड़की के कथित अपहरण, जबरन धर्म परिवर्तन और शादी के मामले को लेकर अल्पसंख्यक अधिकार संगठन वॉयस ऑफ पाकिस्तान माइनॉरिटी ने कड़ी निंदा की है और देश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताई है।

संगठन के मुताबिक, 9वीं कक्षा में पढ़ने वाली पूजा, जो रामसुन ठाकुर की बेटी है, का कथित तौर पर अपहरण कर उसे जबरन धर्म परिवर्तन के लिए मजबूर किया गया। दावा किया गया है कि उसका नाम बदलकर ‘दुआ फातिमा’ रखा गया और उसकी शादी इमरान अली से करा दी गई।

संगठन ने इसे “क्रूर प्रक्रिया” बताते हुए कहा कि इससे लड़की की पहचान छीन ली गई और उसे ऐसी जिंदगी जीने के लिए मजबूर किया गया, जिसे उसने कभी नहीं चुना।

रिपोर्ट के अनुसार, इस घटना को लेकर परिवार की पीड़ा सोशल मीडिया और विभिन्न अल्पसंख्यक संगठनों के बीच व्यापक रूप से साझा की जा रही है, जिससे सिंध में हिंदू लड़कियों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ी है।

वॉयस ऑफ पाकिस्तान माइनॉरिटी ने कहा कि पाकिस्तान में जबरन धर्म परिवर्तन की घटनाएं कोई अलग-थलग मामला नहीं हैं, बल्कि खासकर सिंध में यह एक गंभीर और लगातार बनी रहने वाली समस्या है, जहां हिंदू परिवार अपनी बेटियों की सुरक्षा को लेकर हमेशा भय में जीते हैं।

संगठन ने यह भी कहा कि ऐसे मामलों में अक्सर विरोधाभासी बयान सामने आते हैं, जिससे न्याय प्रक्रिया प्रभावित होती है। अदालतों में लड़कियों द्वारा “स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन” का दावा किया जाता है, जबकि परिवार अपहरण और दबाव की बात करते हैं।

हालांकि इस मामले में अभी तक पुलिस या अदालत की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। संगठन ने कहा कि आमतौर पर ऐसे मामलों में उम्र और सहमति की जांच होती है, लेकिन परिस्थितियां अक्सर पीड़ित पक्ष के खिलाफ होती हैं।

मानवाधिकार संगठनों ने सिंध में बढ़ते अपहरण, बाल विवाह और जबरन धर्म परिवर्तन के मामलों को लेकर चिंता जताई है और कहा है कि ये घटनाएं कानून के प्रावधानों का उल्लंघन करती हैं।

संगठन ने मांग की है कि मामले की पारदर्शी जांच हो, पीड़ितों के लिए सख्त सुरक्षा उपाय लागू किए जाएं और ऐसी घटनाओं पर रोक लगाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।