सागर, जीशान खान। बुंदेलखंड की पारंपरिक युद्धकला को देश-दुनिया में पहचान दिलाने वाले वरिष्ठ कलाकार भगवानदास रैकवार का शनिवार को निधन हो गया। वे 83 वर्ष के थे और पिछले कुछ समय से अस्वस्थ चल रहे थे। उनका उपचार भोपाल के एक निजी अस्पताल में जारी था, जहां उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन से कला जगत और बुंदेलखंड क्षेत्र में शोक की लहर फैल गई है।
भगवानदास रैकवार ने अपने जीवन का अधिकांश समय बुंदेली मार्शल आर्ट के संरक्षण और प्रसार को समर्पित किया। उन्होंने इस लोक युद्धकला को नई पहचान दिलाने के लिए सरकारी नौकरी तक त्याग दी। उनका मानना था कि पारंपरिक कलाएं ही समाज की सांस्कृतिक जड़ों को मजबूत बनाती हैं।
केंद्र सरकार ने वर्ष 2026 के लिए उन्हें पद्मश्री सम्मान हेतु चयनित किया था। यह सम्मान उन्हें बुंदेली मार्शल आर्ट में उनके विशिष्ट योगदान के लिए दिया जाना था। हालांकि सम्मान समारोह से पहले ही उनका निधन हो जाने से कला जगत को गहरा आघात पहुंचा है।
रैकवार ने इस पारंपरिक कला को स्थानीय मंचों से आगे बढ़ाकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाया। उन्होंने विभिन्न राज्यों और विदेशों में प्रदर्शन कर बुंदेली मार्शल आर्ट की विशिष्ट पहचान स्थापित की।
वे केवल कलाकार ही नहीं, बल्कि एक मार्गदर्शक भी थे। उनके सान्निध्य में सैकड़ों युवाओं ने इस कला को सीखा। वे अनुशासन, आत्मरक्षा और सांस्कृतिक मूल्यों पर विशेष जोर देते थे, जिससे कई युवाओं को नई दिशा मिली। परिजनों के अनुसार, उनका अंतिम संस्कार 19 अप्रैल रविवार को सागर के नरयावली नाका स्थित मुक्तिधाम में किया जाएगा। अंतिम विदाई में बड़ी संख्या में शिष्य, कला प्रेमी और आमजन शामिल होने की संभावना है। जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों के भी श्रद्धांजलि देने पहुंचने की उम्मीद है।



