भोपाल। मध्य प्रदेश में ड्राइविंग लाइसेंस (DL) बनवाने और उसके नवीनीकरण की प्रक्रिया अब पहले से कहीं अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और हाईटेक होने जा रही है। परिवहन विभाग ने 'फेसलेस' सुविधा के अंतर्गत AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) आधारित फेस वेरिफिकेशन प्रणाली लागू करने का निर्णय लिया है। इस नई व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य फर्जी दस्तावेजों और गलत पहचान के आधार पर लाइसेंस रिन्यू कराने वाले गिरोहों पर नकेल कसना है।


कैसे काम करेगा AI सॉफ्टवेयर?

परिवहन आयुक्त उमेश जोगा के अनुसार, अब 15 साल पुराने लाइसेंस को रिन्यू कराने वाले आवेदकों के लिए चेहरे का मिलान अनिवार्य होगा। AI सॉफ्टवेयर आवेदक के पुराने लाइसेंस की फोटो और वर्तमान लाइव फोटो का मिलान करेगा। यदि दोनों फोटो में सामंजस्य नहीं पाया जाता है, तो आवेदन प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ेगी। यह प्रणाली सबसे पहले भोपाल RTO से पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू की जा रही है, जिसे जल्द ही पूरे प्रदेश में लागू किया जाएगा।


क्यों पड़ी इस तकनीक की जरूरत?

मध्य प्रदेश के मौजूदा आंकड़ों पर नजर डालें तो प्रदेश में वर्तमान में लगभग 70 लाख ड्राइविंग लाइसेंस सक्रिय हैं। हर साल करीब 6 लाख नए लाइसेंस जारी किए जाते हैं। पुराने लाइसेंसों में फोटो धुंधली होने या उम्र के साथ चेहरा बदलने के कारण सही पहचान करना आरटीओ अधिकारियों के लिए एक बड़ी चुनौती थी, जिसका फायदा उठाकर फर्जीवाड़े किए जा रहे थे।


ऑनलाइन रिन्यूअल की प्रक्रिया: 5 आसान स्टेप्स

आवेदक अब घर बैठे परिवहन पोर्टल के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं:

Step: 1. पोर्टल: परिवहन सेवा पर जाकर 'Driving License Related Services' चुनें।

Step: 2. राज्य: ड्रॉप-डाउन मेनू से 'Madhya Pradesh' का चयन करें।

Step: 3. आवेदन: 'Apply for DL Renewal' पर क्लिक कर अपना डीएल नंबर और जन्मतिथि दर्ज करें।

Step: 4. दस्तावेज: जरूरी फॉर्म (फॉर्म-9 और 40 वर्ष से अधिक आयु वालों के लिए मेडिकल फॉर्म-1A) अपलोड करें।

Step: 5. वेरिफिकेशन: फीस जमा करने के बाद आरटीओ में स्लॉट बुक करें, जहाँ AI तकनीक से आपका फेस वेरिफिकेशन पूरा किया जाएगा।


इस कदम के बड़े फायदे:

साइबर सुरक्षा: फर्जी पहचान के जरिए लाइसेंस बनवाने की गुंजाइश खत्म होगी।

पारदर्शिता: मानवीय हस्तक्षेप कम होने से भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी।

विश्वसनीयता: रिन्यूअल की प्रक्रिया तेज, सुरक्षित और पूरी तरह भरोसेमंद बनेगी।