​शिवपुरी। मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले में शनिवार दोपहर प्रकृति का रौद्र रूप देखने को मिला, जहाँ महज 15 मिनट तक चली 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार वाली धूल भरी आंधी और तेज बारिश ने भारी तबाही मचाई। इस विनाशकारी तूफान के कारण शहर से लेकर गांवों तक हर तरफ मलबा और टूटे हुए पेड़ों का अंबार लग गया, जिससे जनजीवन पूरी तरह से अस्त-व्यस्त हो गया।


तूफान का सबसे दुखद असर करैरा के बांसवेरा में देखने को मिला, जहाँ एक मकान की छत गिरने से 63 वर्षीय कमलेश परमार और उनका बेटा कुलदीप उर्फ पिंटू परमार मलबे में दब गए। ग्रामीणों की हिम्मत और तत्परता के चलते पत्थर हटाकर दोनों को सुरक्षित बाहर निकाला गया, जबकि शिवपुरी के पोलो ग्राउंड में बाउंड्रीवाल गिरने से चार युवक घायल हो गए, जिन्हें जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है।


शहर के प्रमुख चौक-चौराहों पर भी तबाही के निशान स्पष्ट दिखे, जहाँ माधव चौक पर एक विशाल नीम का पेड़ गिरने से कई दोपहिया वाहन क्षतिग्रस्त हो गए और महल कॉलोनी व इंडस्ट्रियल एरिया में कारों के ऊपर पेड़ गिर गए। राजेश्वरी रोड सहित कई इलाकों में पेड़ और बिजली के खंभे उखड़ने से बिजली सप्लाई पूरी तरह ठप हो गई। बिजली कंपनी के अनुसार, इस छोटे से अंतराल में ही शहर के लगभग 62 पोल धराशायी हो गए, जिसके बाद प्रशासन और बिजली विभाग की टीमें देर शाम तक व्यवस्था बहाली में जुटी रहीं।


तूफान ने न केवल संरचनाओं को नुकसान पहुँचाया, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में आगजनी की घटनाओं को भी हवा दी। नरवर तहसील के सिमरिया, इमलिया और पारागढ़ गांवों में गेहूं की नरवाई से उठी आग ने आंधी के कारण विकराल रूप ले लिया, जिससे किसानों का लगभग 100 बीघा में खड़ा लहसुन और 100 से अधिक भूसे व कंडों के कूप जलकर राख हो गए। इसी तरह भीमपुर तहसील के बर्राढाना गांव में चूल्हे की एक चिंगारी ने आंधी के बीच 18 मकानों को जलाकर खाक कर दिया। इस हादसे में तीन गैस सिलेंडरों के फटने से गांव में दहशत फैल गई और खूंटे पर बंधे होने के कारण 30 से अधिक बकरियां व 25 मवेशी जिंदा जल गए। कलेक्टर डॉ. सौरभ संजय सोनवणे ने घटनास्थल का दौरा कर पीड़ितों के लिए रहने और भोजन की व्यवस्था के निर्देश दिए हैं।