मुलताई (बैतूल)। बैतूल जिले की मुलताई नगर पालिका में अध्यक्ष पद को लेकर लंबे समय से जारी कानूनी खींचतान अब अपने अंतिम पड़ाव पर पहुँच गई है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा याचिका खारिज किए जाने के बाद नीतू परमार के पुनः अध्यक्ष पद की कमान संभालने का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है। शीर्ष अदालत ने वर्षा गढ़ेकर द्वारा दायर उस याचिका को प्रारंभिक सुनवाई में ही निरस्त कर दिया, जिसमें मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी गई थी।


जानकारी के अनुसार, वर्षा गढ़ेकर ने 6 अप्रैल 2026 को आए मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के उस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, जिसने नीतू परमार को अध्यक्ष पद पर बहाल करने का निर्णय सुनाया था। सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता को किसी भी प्रकार की अंतरिम राहत नहीं मिली। नीतू परमार की ओर से अधिवक्ता जयवीर नागर और आकाश नागर ने पैरवी की। गौरतलब है कि नीतू परमार ने पहले ही सुप्रीम कोर्ट में केविएट दायर कर दी थी, ताकि उनका पक्ष सुने बिना कोई एकतरफा आदेश पारित न हो सके। इससे पहले, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने लगभग 90 दिनों तक चली विस्तृत सुनवाई के बाद नीतू परमार के पक्ष में फैसला सुनाया था। हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद तकनीकी रूप से नीतू परमार ही मुलताई नगर पालिका की वैध अध्यक्ष हैं। सुप्रीम कोर्ट के ताजा रुख के बाद अब हाईकोर्ट का वह आदेश यथावत प्रभावी बना हुआ है।


कानूनी अड़चनें दूर होने के बाद नीतू परमार ने पदभार ग्रहण करने की तैयारी तेज कर दी है। उन्होंने मुख्य नगरपालिका अधिकारी (CMO) को विधिवत आवेदन देकर चार्ज सौंपने की मांग की है। हालांकि, नीतू परमार के समर्थकों का आरोप है कि अदालती आदेश के बावजूद प्रशासन द्वारा कार्यभार सौंपने की प्रक्रिया में जानबूझकर देरी की जा रही है। इस संबंध में उन्होंने बैतूल कलेक्टर डॉ. सौरभ संजय सोनवणे से भी शिकायत की है और तत्काल प्रभाव से चार्ज दिलाने की मांग की है। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद मुलताई की स्थानीय राजनीति में हलचल तेज है। अब सबकी नजरें प्रशासन पर टिकी हैं कि नीतू परमार को कब तक औपचारिक रूप से कुर्सी सौंपी जाती है।