पिछोर। प्रधानमंत्री की मिमिक्री कर वीडियो बनाने के आरोप में निलंबित किए गए शिक्षक साकेत पुरोहित ने अब सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर न्याय की गुहार लगाई है। अपने भावुक पत्र में साकेत ने खुद को एक साधारण शिक्षक बताते हुए कहा कि उनका उद्देश्य केवल लोगों को मुस्कुराना और जीवन के सरल मूल्यों को समझाना था, न कि किसी का अपमान करना।


उन्होंने लिखा कि एक शिक्षक के रूप में वे केवल किताबों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि समाज को सकारात्मक संदेश देने का प्रयास करते हैं। उसी भावना से उन्होंने वीडियो में प्रधानमंत्री की शैली में बात कही थी, लेकिन इस रचनात्मक प्रयास के चलते उन्हें निलंबन जैसी कठोर कार्रवाई का सामना करना पड़ा।


साकेत ने पत्र में सवाल उठाया कि क्या रचनात्मक अभिव्यक्ति अब अपराध बन गई है? उन्होंने प्रधानमंत्री के “मन की बात” कार्यक्रम का उल्लेख करते हुए कहा कि उसी से प्रेरित होकर उन्होंने अपनी बात रखने की कोशिश की, लेकिन उनकी आवाज को दबा दिया गया।


उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उनके खिलाफ की गई कार्रवाई प्रधानमंत्री की छवि का सहारा लेकर की गई है, जो लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप नहीं है। साथ ही उन्होंने कहा कि इस घटना से उनका आत्मसम्मान आहत हुआ है और उनकी नीयत पर सवाल उठाए गए हैं।


अंत में साकेत पुरोहित ने प्रधानमंत्री से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा सुनिश्चित करने की अपील की है, ताकि भविष्य में किसी शिक्षक या नागरिक की आवाज इस तरह दबाई न जाए।