भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में नगर निगम के अंदर एक बड़ा भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है। लोकायुक्त पुलिस ने बिना किसी काम कराए फर्जी बिलों के जरिए करोड़ों रुपये निकालने के आरोप में बड़ी कार्रवाई की है। इस घोटाले में अपर आयुक्त (वित्त) गुणवंत सेवितकर सहित अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।


आरोप है कि नगर निगम की केंद्रीय कार्यशाला, मोटर वर्कशॉप, जलकार्य और सामान्य प्रशासन जैसे विभागों में वाहनों की मरम्मत, रंगाई-पुताई और अन्य कार्यों के नाम पर फर्जी ई-बिल तैयार किए गए। इन फर्जी बिलों को SAP सॉफ्टवेयर के माध्यम से पास कराकर परिचितों तथा रिश्तेदारों की फर्मों में भुगतान ट्रांसफर किया जाता था और बदले में कमीशन लिया जाता था। बिना कोई वास्तविक काम हुए ही लाखों-करोड़ों रुपये की राशि निकाली गई।


शिकायत नवंबर 2025 में लोकायुक्त को मिली थी। प्रारंभिक जांच में आरोप सही पाए जाने के बाद 9 मार्च को अपर आयुक्त गुणवंत सेवितकर और अन्य के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधित 2018) के साथ ही भारतीय दंड संहिता की धारा 420 (धोखाधड़ी), 467, 468, 471 (फर्जीवाड़ा) और 120-बी (आपराधिक षड्यंत्र) के तहत मामला दर्ज किया गया।


लोकायुक्त टीम ने न्यायालय से सर्च वारंट प्राप्त कर भोपाल नगर निगम के सर्वर सेंटर और संबंधित शाखाओं में छापेमारी की। टीम ने SAP सॉफ्टवेयर की हार्ड डिस्क और पिछले लगभग 10 वर्षों का डेटा जब्त कर लिया है। सर्वर रूम को सील किया गया और डेटा रिकवर करने की प्रक्रिया जारी है। लोकायुक्त एसपी दुर्गेश राठौर के अनुसार जांच आगे बढ़ रही है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।