मंदसौर, ललित शंकर धाकड़। मंदसौर के दलौदा में गुरुवार देर शाम एक मालगाड़ी के पटरी से उतरने (डिरेलमेंट) के कारण रेल यातायात घंटों तक बाधित रहा। यह हादसा उस वक्त हुआ जब दलौदा से मंदसौर के बीच नवनिर्मित दोहरीकरण ट्रैक पर अंतिम चरण का निरीक्षण कार्य चल रहा था। इस घटना ने रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था और कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं।
जानकारी के अनुसार, मंदसौर से नीमच के बीच रेलवे दोहरीकरण का कार्य लगभग पूरा हो चुका है। महज दलौदा से मंदसौर के बीच का 14 किलोमीटर का टुकड़ा शेष था, जिसका सीआरएस (CRS) निरीक्षण वर्तमान में चल रहा है। शुक्रवार 8 मई को इस नए ट्रैक पर हाई स्पीड ट्रायल होना प्रस्तावित है, लेकिन उससे ठीक पहले हुए इस हादसे ने अधिकारियों के हाथ-पांव फुला दिए हैं। शुरुआती जांच और मौके से सामने आए वीडियो फुटेज से यह संकेत मिल रहे हैं कि हादसा 'ट्रैक चेंजिंग पोजीशन' में हुई मानवीय या तकनीकी त्रुटि के कारण हुआ। वीडियो में एक इंजन मौके पर खड़ा दिखाई दे रहा है, जिसने मालगाड़ी के डिब्बे को पीछे से टक्कर मारी। ऐसा प्रतीत होता है कि गलत सिग्नल या ट्रैक चेंजिंग में गड़बड़ी के कारण दोनों गाड़ियों को एक ही ट्रैक पर डाल दिया गया था, जिससे टक्कर हुई और डिब्बा पटरी से नीचे उतर गया।
3 घंटे ठप रहा यातायात, रतलाम से पहुंची ART टीम
हादसे की सूचना मिलते ही रेलवे प्रशासन में हड़कंप मच गया। रतलाम से एक्सीडेंट रिलीफ ट्रेन (ART) की टीम को तत्काल मौके पर रवाना किया गया। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान लगभग 3 घंटे से अधिक समय तक रेलवे ट्रैक पूरी तरह बंद रहा, जिससे दोनों दिशाओं की कई यात्री ट्रेनें प्रभावित हुईं और यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
हादसे की गंभीरता को देखते हुए रेलवे के आला अधिकारी फिलहाल विस्तार से कुछ भी कहने से बच रहे हैं। आधिकारिक तौर पर केवल डिब्बे के पटरी से उतरने की पुष्टि की जा रही है, लेकिन टक्कर की बात पर पर्दा डालने की कोशिश की जा रही है। जानकारों का मानना है कि यदि यह हादसा किसी यात्री ट्रेन के साथ होता, तो परिणाम अत्यंत भयावह हो सकते थे।
वर्तमान में युद्धस्तर पर ट्रैक को दुरुस्त करने का कार्य जारी है ताकि प्रस्तावित स्पीड ट्रायल को समय पर पूरा किया जा सके। रेलवे बोर्ड इस मामले में उच्च स्तरीय जांच के आदेश दे सकता है ताकि भविष्य में ऐसी पुनरावृत्ति न हो।



