छतरपुर। छतरपुर जिले के पड़रिया चौकी क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले नेगुंवा गांव में रविवार का दिन एक ऐसी हृदयविदारक घटना का गवाह बना, जिसने पूरे बुंदेलखंड को झकझोर कर रख दिया है। सुनहरी गेहूं की फसल काटने पहुंचे एक युवा ऑपरेटर के साथ जो हुआ, उसका सार उस जानलेवा लापरवाही में छिपा है जहाँ आसमान से गुजर रही 11 केवी की बिजली लाइनें मौत का जाल बनकर लटक रही थीं। एक पल की चूक और मशीन के ऊपरी हिस्से का तार से स्पर्श होना—न केवल लाखों के हार्वेस्टर को लोहे के कंकाल में तब्दील कर गया, बल्कि एक मेहनतकश युवक को संभलने का मौका दिए बिना अग्नि के हवाले कर दिया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हादसा उस वक्त हुआ जब राजनगर के नहदोरा निवासी 27 वर्षीय शैलेंद्र पटेल हार्वेस्टर से गंगादीन अहिरवार के खेत में गेहूं की कटाई कर रहा था। अचानक मशीन का ऊपरी हिस्सा ऊपर से गुजर रही हाईटेंशन लाइन से टकरा गया, जिससे पूरी मशीन में तीव्र करंट दौड़ गया। शॉर्ट सर्किट के कारण निकली चिंगारियों ने पल भर में विकराल आग का रूप ले लिया। आग इतनी भीषण और अचानक थी कि केबिन में बैठा शैलेंद्र बाहर नहीं निकल सका और मशीन के भीतर ही फंस गया। धुएं और लपटों के बीच घिरे युवक की मौके पर ही जिंदा जलकर दर्दनाक मौत हो गई, जिससे मौके पर मौजूद लोगों के रोंगटे खड़े हो गए।
32 लाख की मशीन राख और किसान की साल भर की मेहनत बर्बाद
इस भीषण अग्निकांड में सटई निवासी बालक पटेल का करीब 30 से 32 लाख रुपये की कीमत का हार्वेस्टर पूरी तरह जलकर खाक हो गया है। आग की लपटें इतनी तेज थीं कि उन्होंने खेत में खड़ी फसल को भी अपनी चपेट में ले लिया। पड़रिया चौकी प्रभारी कमला सिंह के अनुसार, इस हादसे में लगभग 1 से 2 बीघा की फसल जल गई है, जिससे तकरीबन 30 से 35 क्विंटल गेहूं राख के ढेर में बदल गया। ग्रामीणों ने अपने स्तर पर आग बुझाने का भरसक प्रयास किया, लेकिन हाईटेंशन लाइन की मौजूदगी और आग की तीव्रता के सामने उनकी कोशिशें नाकाम साबित हुईं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की प्रशासनिक सजगता के दौर में, इस हादसे ने बिजली विभाग के सुरक्षा मानकों पर गंभीर प्रश्नचिन्ह लगा दिया है।
बिजली कंपनी की लापरवाही पर आक्रोश और जांच की मांग
हादसे के बाद नेगुंवा और आसपास के ग्रामीणों में बिजली कंपनी के खिलाफ भारी गुस्सा देखा गया। स्थानीय लोगों का सीधा आरोप है कि खेतों के ऊपर से गुजर रही हाईटेंशन लाइनें काफी नीचे लटक रही हैं, जिसकी शिकायत के बावजूद कोई सुधार नहीं किया गया। ग्रामीणों ने इस मौत के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई और मृतक शैलेंद्र के पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा देने की मांग की है। सूचना मिलने पर प्रशासनिक अमला मौके पर पहुंचा और शव का पोस्टमार्टम कराकर परिजनों को सौंप दिया गया है। प्रशासन ने अब इस मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी है ताकि भविष्य में नहदोरा के शैलेंद्र जैसा कोई और युवा सिस्टम की लापरवाही की भेंट न चढ़े।



