छतरपुर। मध्य प्रदेश युवा कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष यश घनघोरिया ने केन-बेतवा लिंक परियोजना के विस्थापितों के मुद्दे पर भाजपा सरकार और स्थानीय प्रशासन को आड़े हाथों लिया है। छतरपुर प्रवास के दौरान मीडिया से चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि 11 दिनों तक भीषण गर्मी और विपरीत परिस्थितियों में चिता पर लेटे आदिवासियों की सुध न लेना सरकार की निष्ठुरता को दर्शाता है। घनघोरिया ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने आश्वासन देकर धरना तो समाप्त करवा दिया है, लेकिन यदि यह महज एक छलावा निकला तो युवा कांग्रेस चुप नहीं बैठेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि बिना किसी ठोस पुनर्वास और सम्मानजनक मुआवजे के विस्थापित करना आदिवासियों की अस्मिता पर प्रहार है और कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व इस लड़ाई को लड़ने के लिए प्रतिबद्ध है।


मुआवजे के वितरण में व्याप्त विसंगतियों और भ्रष्टाचार पर प्रहार करते हुए युवा कांग्रेस अध्यक्ष ने इसे 'कमीशनखोरों की सरकार' करार दिया। उन्होंने कहा कि एक तरफ विस्थापित परिवार अपने हक के लिए संघर्ष कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर भ्रष्टाचार का आलम यह है कि पटवारी सरेआम रिश्वत की मांग कर रहे हैं। उन्होंने कांग्रेस नेताओं के साथ वन विभाग के अमले द्वारा किए गए विवाद और एफआईआर (FIR) की धमकियों को जनता की आवाज दबाने का प्रयास बताया। घनघोरिया के अनुसार, शासन पिछले 11 दिनों से लगातार विपक्षी साथियों को रोकने और पीड़ितों की आवाज को कुचलने का काम कर रहा है, लेकिन वे गांधी के अनुयायी हैं और इन दमनकारी नीतियों से डरने वाले नहीं हैं।


क्षेत्र की बिगड़ती कानून व्यवस्था और किसानों की दुर्दशा पर चिंता जताते हुए यश घनघोरिया ने कहा कि छतरपुर अब अपराध के मामले में भिंड-मुरैना को भी पीछे छोड़ रहा है। जिले में लगातार हो रही कस्टोडियल डेथ (हिरासत में मौतें) और आपराधिक घटनाओं में भाजपा नेताओं के परिजनों की संलिप्तता यह दर्शाती है कि पुलिस प्रशासन भारी दबाव में काम कर रहा है। उन्होंने किसानों के मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए कहा कि गेहूं खरीदी को लेकर सरकार का रुख किसान विरोधी है; जो गेहूं 3500-4000 रुपये प्रति क्विंटल बिकना चाहिए था, उसे किसान मजबूरी में औने-पौने दामों पर बेच रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि इन तमाम मुद्दों को लेकर युवा कांग्रेस जल्द ही छतरपुर में एक बड़ा जनांदोलन करेगी।


महिला आरक्षण और राजनीति में बढ़ती वैचारिक गिरावट के सवाल पर उन्होंने भाजपा की नीतियों को केवल दिखावा बताया। उन्होंने कहा कि 33 प्रतिशत आरक्षण एक अच्छी पहल है, लेकिन भाजपा की कथनी और करनी में बड़ा अंतर होता है; उनकी योजनाएं केवल कागजों पर अच्छी लगती हैं, धरातल पर क्रियान्वयन शून्य रहता है। सीहोर में कांग्रेस कार्यालय पर हुए हमले का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि भाजपा 'गोडसे' की विचारधारा को चरितार्थ कर रही है, जो राजनीति के लिए शुभ संकेत नहीं है। यश घनघोरिया ने दोहराया कि युवाओं और आदिवासियों के अधिकारों के लिए उनका संघर्ष सड़कों से लेकर सदन तक जारी रहेगा।