इंदौर। इंदौर में रविवार को दशहरा मैदान पर आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने नर्मदा जल प्रदाय योजना के चौथे चरण का भूमिपूजन किया। करीब 1356 करोड़ रुपये की लागत वाली यह योजना नगर निगम का अब तक का सबसे बड़ा प्रोजेक्ट मानी जा रही है। इसके तहत नर्मदा नदी से 400 एमएलडी यानी प्रतिदिन 40 करोड़ लीटर अतिरिक्त पानी शहर को मिलेगा, जो लगभग 70 किलोमीटर दूर से पंपिंग के जरिए लाया जाएगा।
इस परियोजना के पूरा होने के बाद इंदौर को मिलने वाला कुल पानी 540 एमएलडी से बढ़कर 900 एमएलडी से अधिक हो जाएगा। यह व्यवस्था 2029 तक शुरू होने की उम्मीद है। मुख्यमंत्री ने कहा कि 2047 तक इंदौर की आबादी करीब 65 लाख और मेट्रो क्षेत्र की आबादी डेढ़ करोड़ तक पहुंच सकती है, इसलिए भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए यह योजना तैयार की जा रही है।
नर्मदा जल योजना का इतिहास 1978 से जुड़ा है, जब पहले चरण की शुरुआत हुई थी। इसके बाद 1992 में दूसरा और 2006-2010 के बीच तीसरा चरण लागू हुआ। अब चौथे चरण में 39 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन, 2870 मीटर लंबी सुरंग, 20 नए ओवरहेड टैंक, सैकड़ों किलोमीटर वितरण पाइपलाइन और लाखों नए जल कनेक्शन दिए जाएंगे। इस पूरी योजना से करीब 2.47 लाख परिवारों को सीधा लाभ मिलेगा और शहर में 24x7 पानी सप्लाई की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
कार्यक्रम में नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने इसे ऐतिहासिक उपलब्धि बताया, वहीं महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने कहा कि यह योजना इंदौर के अगले 25 साल के विकास की नींव रखेगी।
इस दौरान मुख्यमंत्री ने सिंहस्थ 2028 को लेकर भी बड़ा ऐलान किया। उन्होंने बताया कि इस बार क्षिप्रा नदी में प्राकृतिक जल प्रवाह सुनिश्चित करने के लिए 1000 करोड़ रुपये की योजना बनाई जा रही है, ताकि करीब 60 साल बाद श्रद्धालु क्षिप्रा के वास्तविक जल से स्नान कर सकें।

