छतरपुर में पहली बार बिना शोर के निकली 'मर्यादा वाली ध्वज यात्रा': केसरिया ध्वज लेकर झूमे रामभक्त, पुष्पवर्षा से सराबोर हुईं गलियां

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छतरपुर (पंकज यादव) । बुंदेलखंड की धर्मनगरी छतरपुर में शुक्रवार को भक्ति का एक ऐसा स्वरूप देखने को मिला, जिसने आधुनिक चकाचौंध और कानफोड़ू शोर-शराबे को पीछे छोड़कर 'मर्यादा पुरुषोत्तम' के वास्तविक आदर्शों की याद दिला दी। श्रीराम सेवा समिति के तत्वाधान में निकाली गई इस ध्वज यात्रा ने एक नई और गौरवशाली परंपरा की नींव रखी है, जिसकी चर्चा अब पूरे प्रदेश में हो रही है।
इस बार की सबसे खास और सराहनीय बात यह रही कि पूरी यात्रा बिना किसी डीजे (DJ) के निकाली गई। समिति ने एक साहसी और ऐतिहासिक निर्णय लिया है कि बेफिजूल के शोर-शराबे और ध्वनि प्रदूषण को रोकने की मंशा से इस वर्ष मुख्य शोभायात्रा में भी डीजे का उपयोग नहीं किया जाएगा। कान फाड़ने वाले म्यूजिक की जगह इस बार छतरपुर की सड़कों पर ढोल-नगाड़ों की थाप, शंख की पवित्र गूंज और झालर की खनक सुनाई दी। धीमी आवाज में बज रहे राम भजनों ने वातावरण को पूरी तरह आध्यात्मिक और भक्तिमय बना दिया।
पुष्पवर्षा और चंदन तिलक से हुआ स्वागत
श्रीराम जन्मोत्सव की तैयारियों के उपलक्ष्य में निकाली गई यह यात्रा गांधी चौक बाजार से प्रारंभ हुई। जैसे-जैसे कारवां हटवारा, मऊदरवाजा, बस स्टैंड और जवाहर रोड से गुजरा, मानो पूरा शहर 'राममय' हो गया। रास्ते भर भक्तों ने पुष्पवर्षा कर यात्रा का भव्य स्वागत किया। जब यह ध्वज यात्रा हनुमान टौरिया मंदिर पहुँची, तो वहां का नजारा देखते ही बनता था। हनुमान टौरिया सेवा समिति के सदस्यों ने सभी राम भक्तों का चंदन से तिलक लगाकर और फूल बरसाकर भावभीना स्वागत किया।
मंदिर परिसर में पहुँचकर उत्साह का सैलाब उमड़ पड़ा। ढोल-नगाड़ों की थाप पर भक्त अपने सिर पर धर्म ध्वज लेकर जमकर झूमे। जय श्रीराम के जयकारों से पूरा आसमान गुंजायमान हो उठा। विधि-विधान से भगवान श्रीराम के अनन्य भक्त हनुमान जी महाराज की उपस्थिति में ध्वज का पूजन किया गया। समिति के सदस्यों और सभी राम भक्तों ने संकटमोचन के चरणों में शीश नवाकर आगामी जन्मोत्सव की सफलता का आशीर्वाद लिया।
छतरपुर की इस पहल ने साबित कर दिया कि आस्था दिखाने के लिए शोर की नहीं, बल्कि शुद्ध भाव की जरूरत होती है। बिना डीजे के निकाली गई यह यात्रा आने वाले समय के लिए एक बड़ा संदेश है।


