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साल का पहला चंद्रग्रहण मार्च में : भारत में भी दिखेगा?

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19 जनवरी 2026, 06:34 am IST
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नई दिल्ली– साल 2026 खगोलीय घटनाओं से भरपूर रहने वाला है। वैदिक ज्योतिष और हिंदू परंपरा के अनुसार, साल का पहला चंद्रग्रहण 3 मार्च 2026 (मंगलवार) को फाल्गुन पूर्णिमा पर लगेगा। यह पूर्ण चंद्रग्रहण (Total Lunar Eclipse) होगा, जिसे ब्लड मून भी कहा जाता है, क्योंकि ग्रहण के दौरान चंद्रमा गहरा लाल रंग का दिखाई देता है। खास बात यह है कि यह ग्रहण भारत में भी दिखाई देगा, हालांकि यहां यह आंशिक रूप से (partial visibility) दिखेगा, क्योंकि चंद्रमा उदय के समय ग्रहण प्रक्रिया में होगा।

भारत में दिखाई देने का समय और विवरण

भारतीय समयानुसार (IST), ग्रहण की मुख्य घटनाएं इस प्रकार हैं:

ग्रहण की शुरुआत (Penumbral phase) दोपहर लगभग 2:16 बजे से।

आंशिक ग्रहण (Partial phase) दोपहर 3:21 बजे से।

अधिकतम ग्रहण (Maximum eclipse) शाम लगभग 5:03 बजे IST के आसपास (UTC 11:33)।

भारत में चंद्रोदय के साथ शाम 6:22 बजे से 6:46 बजे तक मुख्य दृश्यता होगी, और ग्रहण शाम 7:53 बजे तक समाप्त हो जाएगा।

यह ग्रहण एशिया (भारत सहित), ऑस्ट्रेलिया, उत्तरी अमेरिका और अन्य क्षेत्रों में दिखेगा। भारत के अधिकांश हिस्सों जैसे मध्य प्रदेश, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार, पूर्वोत्तर राज्य आदि में यह स्पष्ट रूप से दिखाई देगा। मौसम साफ होने पर बिना किसी विशेष उपकरण के नंगी आंखों से देखा जा सकता है।

यहां कुछ आकर्षक दृश्यों के उदाहरण दिए गए हैं, जो ब्लड मून के दौरान चंद्रमा कैसा दिखता है:

(नोट: ये चित्र पिछले ब्लड मून के समान दृश्य दिखाते हैं, जहां चंद्रमा लाल-नारंगी रंग का हो जाता है।)

धार्मिक महत्व और सूतक काल

यह ग्रहण फाल्गुन पूर्णिमा पर पड़ रहा है, जिस दिन होलिका दहन (3 मार्च शाम) और अगले दिन होली (4 मार्च) मनाई जाती है। ज्योतिष में चंद्रमा मन का कारक है, और सिंह राशि व पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र में यह ग्रहण विशेष महत्व रखता है।

चूंकि ग्रहण भारत में दिखेगा, इसलिए सूतक काल मान्य होगा। सूतक सामान्यतः ग्रहण से 9 घंटे पहले शुरू होता है और ग्रहण समाप्त होने तक रहता है। इस दौरान कई नियमों का पालन किया जाता है:

पूजा-पाठ, मंदिर दर्शन बंद।

खाना-पीना, बाल काटना, तेल लगाना, सिलाई-कढ़ाई आदि से परहेज।

भोजन में तुलसी पत्ते डालकर रखें।

गर्भवती महिलाओं को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए – घर से बाहर न निकलें और ग्रहण न देखें।

ग्रहण समाप्ति के बाद गंगाजल से घर-पूजा स्थल शुद्ध करें।

ग्रहण के दौरान पूजा स्थल को पर्दे से ढक दें और देवी-देवताओं की पूजा न करें।

चंद्रग्रहण कैसे लगता है?

चंद्रग्रहण तब लगता है जब सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा एक सीध में आ जाते हैं। पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ती है, जिससे चंद्रमा अंधकारमय या लाल दिखाई देता है। पूर्ण ग्रहण में चंद्रमा पूरी तरह छिप जाता है, जबकि आंशिक में केवल हिस्सा प्रभावित होता है।

यह दुर्लभ खगोलीय घटना धार्मिक और वैज्ञानिक दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण है। आकाश प्रेमी इसे अवश्य देखें, जबकि धार्मिक लोग सूतक नियमों का पालन करें। अधिक जानकारी के लिए स्थानीय पंचांग या खगोल विशेषज्ञों से संपर्क करें।

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