भिंड, अक्षय जोशी। मध्य प्रदेश के भिंड जिले में पुलिस ने एक बड़े फर्जी आर्म्स लाइसेंस सिंडिकेट का पर्दाफाश किया है, जिसने कानून व्यवस्था को खुली चुनौती देते हुए अवैध हथियारों को वैध बनाने का संगठित नेटवर्क खड़ा कर रखा था। इस सनसनीखेज मामले में 13 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि उनके कब्जे से हथियारों का जखीरा भी बरामद किया गया है। पुलिस की शुरुआती जांच में सामने आया है कि यह कोई साधारण फर्जीवाड़ा नहीं, बल्कि बेहद सुनियोजित और तकनीकी रूप से संचालित सिंडिकेट था, जो पहचान पत्रों में हेरफेर कर और ऑनलाइन सिस्टम को गुमराह कर फर्जी लाइसेंस तैयार कर रहा था।
जानकारी के मुताबिक, इस अवैध कारोबार में एक फर्जी आर्म्स लाइसेंस की कीमत करीब 3 लाख रुपये तय थी। आरोपी पैन कार्ड, आधार कार्ड और फोटो में बदलाव कर ऐसे दस्तावेज तैयार करते थे, जो पहली नजर में पूरी तरह असली लगते थे। इतना ही नहीं, इस गैंग ने ऑनलाइन पोर्टल तक को भ्रमित कर दिया था, जिससे पूरे सिस्टम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। पुलिस की साइबर टीम द्वारा रिकॉर्ड खंगालने के बाद इस पूरे नेटवर्क का खुलासा हुआ। मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि इस रैकेट में आर्म्स शाखा के कुछ कर्मचारी भी शामिल पाए गए हैं। यानी जिन पर कानून व्यवस्था और सुरक्षा की जिम्मेदारी थी, वही लोग सिस्टम के भीतर रहकर इसे कमजोर करने में लगे थे। यह खुलासा प्रशासनिक तंत्र की पारदर्शिता और निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करता है।
कार्रवाई के दौरान पुलिस ने 10 पिस्टल (32 बोर) और 1 राइफल (315 बोर) बरामद की है। सभी गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ जारी है और इस पूरे नेटवर्क के अन्य कड़ियों को तलाशने का प्रयास किया जा रहा है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जांच अभी शुरुआती चरण में है और इस सिंडिकेट से जुड़े हर व्यक्ति को चिन्हित कर सख्त कार्रवाई की जाएगी। इस घटना के सामने आने के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह नेटवर्क सिर्फ भिंड तक सीमित था या इसके तार प्रदेश के अन्य जिलों से भी जुड़े हुए हैं। फिलहाल पुलिस इस एंगल पर भी जांच कर रही है और आने वाले दिनों में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

