कांग्रेस विधायक ने शीर्षासन कर सुनाई अपनी पीड़ा: बोले- मेरे ऊपर भाजपा ने लगाए एक दर्जन फर्जी मुकदमे

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भोपाल, जीतेन्द्र यादव। मध्य प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र का 10वां दिन एक बेहद अनोखे और नाटकीय घटनाक्रम का गवाह बना। शिवपुरी जिले के श्योपुर से कांग्रेस विधायक बाबू जंडेल ने अपने खिलाफ दर्ज हुई एफआईआर (FIR) के विरोध में विधानसभा परिसर स्थित गांधी प्रतिमा के सामने शीर्षासन कर अपना विरोध जताया। विधायक का यह अंदाज पूरे सदन और गलियारों में चर्चा का विषय बना रहा।
मामले की शुरुआत सदन की कार्यवाही के दौरान शून्यकाल में हुई। कांग्रेस विधायक पंकज उपाध्याय और सचेतक सोहन वाल्मीकि ने बाबू जंडेल के खिलाफ दर्ज मामले को जोर-शोर से उठाया। विपक्ष का आरोप था कि विधायक को राजनीतिक द्वेष के चलते निशाना बनाया जा रहा है। हालांकि, विधानसभा अध्यक्ष (स्पीकर) ने जब इस विषय की जानकारी संबंधित विभाग को भेजने की बात कही, तो कांग्रेस विधायक संतुष्ट नहीं हुए। विरोध स्वरूप पूरी कांग्रेस पार्टी ने सदन की कार्यवाही से वॉकआउट कर दिया। इसके ठीक बाद बाबू जंडेल विधानसभा भवन के बाहर पहुंचे और गांधी प्रतिमा के सामने सिर के बल खड़े होकर (शीर्षासन) अनोखा प्रदर्शन शुरू कर दिया।
'मैं उग्रवादी नहीं, यज्ञ का यजमान हूं'
मीडिया से चर्चा करते हुए विधायक बाबू जंडेल ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि 15 फरवरी को उनके क्षेत्र में एक भव्य यज्ञ का आयोजन था, जिसमें हजारों की संख्या में साधु-संत और ब्राह्मण शामिल हुए थे। उन्होंने स्वयं तीन दिनों तक विधि-विधान से हवन कराया और भगवान शिव की स्थापना की। जंडेल के अनुसार, "शिव बारात के दौरान जब साधु-संत पालकियों और घोड़ों पर सवार थे, तब भगवान की खुशी में मैंने 'चढ़ीमार' (दावत का राउंड) से महज एक हर्ष फायर किया था। मेरे पास कोई एके-47 नहीं थी। मैं कोई उग्रवादी नहीं हूं, बल्कि उस पवित्र यज्ञ का यजमान था।"
बाबू जंडेल ने सरकार और प्रशासन पर उनके खिलाफ लगातार झूठे मामले दर्ज करने का आरोप लगाया। उन्होंने याद दिलाया कि तीन महीने पहले दिसंबर में जब उन्होंने गौवंश के संरक्षण के मुद्दे पर कलेक्टर को ज्ञापन दिया था, तब भी उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। जंडेल ने दावा किया कि उनके खिलाफ दर्ज अधिकांश मामले अदालत में टिक नहीं पाते और हाई कोर्ट ने उन्हें सात मामलों में पहले ही बरी कर दिया है। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि उन्हें जेल जाने का डर नहीं है और यदि सरकार ने यह केस वापस नहीं लिया, तो वे गांधी आश्रम और सड़कों पर उतरकर बड़ा आंदोलन करेंगे।
पुलिस की समझाइश पर खत्म हुआ प्रदर्शन
विधानसभा परिसर में शीर्षासन कर रहे विधायक को देखने के लिए बड़ी संख्या में कर्मचारी और अन्य नेता जमा हो गए। स्थिति को देखते हुए सुरक्षाकर्मियों और पुलिस अधिकारियों ने बाबू जंडेल को काफी देर तक समझाया और गांधी प्रतिमा के सामने से हटने का आग्रह किया। पुलिस की समझाइश और वरिष्ठ नेताओं के हस्तक्षेप के बाद विधायक ने अपना शीर्षासन समाप्त किया। हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी है कि यह उनकी लड़ाई का अंत नहीं, बल्कि शुरुआत है।


