कर्नल सोफिया अपमान मामला: SC की MP मंत्री विजय शाह को फटकार

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भोपाल। सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश के मंत्री कुंवर विजय शाह को कर्नल सोफिया कुरैशी पर आपत्तिजनक टिप्पणी के मामले में कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने उनकी ऑनलाइन माफी को खारिज करते हुए कहा कि अब माफी मांगने में बहुत देर हो चुकी है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि विशेष जांच दल (SIT) की रिपोर्ट पर अभियोजन की मंजूरी देने या न देने का फैसला दो हफ्ते के भीतर ले और अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करे।
कोर्ट ने नाराजगी जताई कि SIT ने अपनी जांच पूरी कर अंतिम रिपोर्ट अगस्त 2025 में ही सौंप दी थी, लेकिन सरकार ने महीनों से कोई फैसला नहीं लिया। SIT ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 196 के तहत अभियोजन की सिफारिश की है, जो धर्म-जाति आधारित वैमनस्य फैलाने से जुड़े अपराधों में राज्य की पूर्व अनुमति अनिवार्य बनाती है।
मंत्री की माफी को 'मगरमच्छ के आंसू' बताया
मंत्री विजय शाह की ओर से सीनियर वकील मनिंदर सिंह ने कोर्ट को बताया कि शाह ने माफी मांग ली है और जांच में सहयोग कर रहे हैं। लेकिन बेंच ने इसे सिरे से खारिज कर दिया। चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने टिप्पणी की, "यह कोई माफीनामा नहीं है। अब तो बहुत देर हो चुकी है।" इससे पहले कोर्ट ने शाह की सार्वजनिक और ऑनलाइन माफी को "कानूनी दायित्व से बचने के लिए महज मगरमच्छ के आंसू" करार दिया था।
विवादास्पद बयान का पूरा विवरण
पिछले साल 11 मई को इंदौर के महू (रायकुंडा गांव) में एक कार्यक्रम में मंत्री विजय शाह ने 'ऑपरेशन सिंदूर' का जिक्र करते हुए कहा था- "उन्होंने (आतंकियों ने) कपड़े उतार-उतार कर हमारे हिंदुओं को मारा और मोदी जी ने उनकी बहन को उनकी ऐसी की तैसी करने उनके घर भेजा।" उन्होंने आगे कहा कि मोदी जी ने समाज की बहन को भेजा ताकि बदला लिया जा सके। इस बयान में कर्नल सोफिया कुरैशी (जो ऑपरेशन सिंदूर की ब्रीफिंग देने वाली अधिकारी थीं) को अप्रत्यक्ष रूप से आतंकियों की बहन बताने का आरोप लगा।
इसके बाद 14 मई को महू के मानपुर थाने में FIR दर्ज हुई, जिसे शाह ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। कोर्ट ने हाई कोर्ट की कार्यवाही पर रोक लगाकर SIT गठित की थी।
नेता प्रतिपक्ष का तीखा हमला
विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सोशल मीडिया पर लिखा- "सेना की अधिकारी, देश की बेटी और राष्ट्र के सम्मान पर हमला हुआ, लेकिन भाजपा सरकार महीनों तक SIT रिपोर्ट दबाए बैठी रही। यह सत्ता संरक्षण में पनपती असंवेदनशीलता का उदाहरण है। मंत्री विजय शाह को तत्काल इस्तीफा देना चाहिए। महिलाओं और सेना के सम्मान से कोई समझौता नहीं।"
अन्य आपत्तिजनक टिप्पणियों पर भी जांच
SIT रिपोर्ट में शाह की कुछ अन्य आपत्तिजनक टिप्पणियों का भी जिक्र है। कोर्ट ने SIT को इन मामलों में प्रस्तावित कार्रवाई पर अलग रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया। राज्य सरकार ने दलील दी थी कि मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित होने से कार्रवाई नहीं हुई, लेकिन कोर्ट ने कहा कि यह बहाना कानूनी कर्तव्य से मुक्ति नहीं देता।
