ट्रेन के टॉयलेट में जज की पत्नी का मिला शव: साइलेंट अटैक हो सकता है कारण?

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रतलाम। जिले के जावरा रेलवे स्टेशन पर बुधवार को एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई, जहां कांचीगुड़ा-भगत की कोठी एक्सप्रेस के टॉयलेट में एक महिला यात्री का शव बरामद हुआ। मृतका की पहचान उषा चौहान के रूप में हुई है, जो राजस्थान के निंबाहेड़ा में पदस्थ एडीजे राजकुमार चौहान की पत्नी थीं। सफर के दौरान दोनों पति-पत्नी अलग-अलग कोच में सवार थे, जिससे यह दुखद हादसा तब उजागर हुआ जब ट्रेन अपने गंतव्य पर पहुँच गई और पति को अपनी पत्नी कहीं नजर नहीं आईं।
जानकारी के अनुसार, एडीजे राजकुमार चौहान और उनकी पत्नी उषा चौहान 4 मार्च को राजस्थान के सोयत स्टेशन से निंबाहेड़ा जाने के लिए ट्रेन में बैठे थे। दोनों का रिजर्वेशन अलग-अलग कोच में था। सफर के दौरान निंबाहेड़ा स्टेशन आने से कुछ समय पहले उषा चौहान ने अपने पति को फोन कर बताया था कि वे वॉशरूम जा रही हैं। जब ट्रेन निंबाहेड़ा स्टेशन पहुँची तो जज राजकुमार चौहान अपनी कोच से उतर गए, लेकिन काफी देर इंतजार करने के बाद भी जब उनकी पत्नी बाहर नहीं आईं, तो उन्होंने स्टेशन पर उनकी तलाश शुरू की। काफी खोजबीन और सीसीटीवी फुटेज खंगालने के बाद भी जब पत्नी का सुराग नहीं मिला, तो उन्होंने जीआरपी को मामले की सूचना दी।
जीआरपी ने तत्काल सक्रियता दिखाते हुए महिला के मोबाइल लोकेशन को ट्रेस किया, जिससे पता चला कि लोकेशन अभी भी ट्रेन के अंदर ही आ रही है। इसके बाद मंदसौर स्टेशन पर ट्रेन को रुकवाकर तलाशी ली गई, लेकिन वहां टॉयलेट का दरवाजा अंदर से बंद होने के कारण नहीं खोला जा सका। आखिरकार जब ट्रेन रतलाम जिले के जावरा स्टेशन पहुँची, तब पुलिस ने टॉयलेट का दरवाजा तोड़कर अंदर प्रवेश किया, जहां उषा चौहान बेसुध अवस्था में मिलीं। उन्हें तुरंत जावरा के अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
नीमच जीआरपी थाना प्रभारी मोतीराम चौधरी ने बताया कि प्राथमिक जांच और डॉक्टरों की रिपोर्ट के अनुसार, महिला की मौत साइलेंट हार्ट अटैक आने की वजह से हुई है। वॉशरूम के भीतर अचानक तबीयत बिगड़ने के कारण उन्हें संभलने का मौका नहीं मिला। घटना की जानकारी मिलने के बाद जज राजकुमार चौहान और अन्य परिजन भी जावरा पहुँच गए। पुलिस ने पोस्टमॉर्टम की औपचारिकता पूरी करनी चाही, लेकिन परिजनों ने बिना पोस्टमॉर्टम कराए ही शव को अपने साथ ले जाने का निर्णय लिया। इस दुखद घटना ने ट्रेन में अकेले सफर करने वाले यात्रियों की सुरक्षा और आपातकालीन चिकित्सा सहायता पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

