होली पर सीएम मोहन यादव ने गाना गाकर दिया एकता का संदेश

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भोपाल। रंगों के पर्व होली के मौके पर मध्य प्रदेश की राजनीति में भी रंगों की छंटाकशी और आरोप-प्रत्यारोप का दौर जोरों पर रहा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने आदिवासी अंचल में कृषि कैबिनेट की बैठक के दौरान आदिवासी वेशभूषा में नजर आते हुए ढोल-थाली पर थिरके और फिल्म 'शोले' का मशहूर गाना गाकर प्रेम और एकता का संदेश दिया। उन्होंने गाया- "होली के दिन दिल खिल जाते हैं... रंगों में रंग मिल जाते हैं... अरे गिले शिकवे भूल के दोस्तों... दुश्मन भी गले मिल जाते हैं..."। यह गाना सुनकर मौजूद लोग झूम उठे और सीएम ने मिल-जुलकर रहने की अपील की।
बैठक बड़वानी जिले के नागलवाड़ी में आयोजित की गई, जहां सभी मंत्री आदिवासी परिधान में दिखे। इससे पहले सीएम ने भिलटदेव मंदिर में पूजा-अर्चना भी की। हालांकि इस महत्वपूर्ण कैबिनेट बैठक में दो वरिष्ठ मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और प्रहलाद पटेल शामिल नहीं हुए। कैलाश विजयवर्गीय अलीराजपुर में भगोरिया पर्व में शामिल होकर वहां झूमे-नाचे। उल्लेखनीय है कि तीन दिन पहले खुद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी अलीराजपुर में भगोरिया उत्सव में पहुंचे थे और उन्होंने कहा था कि प्रदेश में आनंद व उत्साह का माहौल है, इसके लिए जोरदार ताली बजाओ।
इस बयान पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने तंज कसा और पुरानी सभा का वीडियो याद दिलाया, जहां वे कार्यकर्ताओं से ताली बजाने की अपील करते नजर आए थे। पटवारी ने कहा था कि उनके कहने पर भी ताली बजती है। वहीं सीएम ने पलटवार में कहा कि वे ताली बजवाते हैं तो विपक्ष के पेट में दर्द होता है, उनके कहने पर कोई ताली नहीं बजाता।
इसी बीच विधानसभा में हालिया 'औकात' विवाद भी फिर सुर्खियों में आ गया। मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार से कहा था- "अपनी औकात में रहें"। सिंघार ने पलटवार में कहा- "औकात दिखा दूंगा"। यह विवाद अडाणी समूह को लेकर आरोपों पर हुआ था, जिसके बाद सदन में हंगामा मचा और सीएम मोहन यादव ने हस्तक्षेप कर माफी मांगी। विजयवर्गीय ने माफी नहीं मांगी, लेकिन खेद जताया। सिंघार ने भगोरिया पर्व में विजयवर्गीय पर तंज कसा कि जो आदिवासियों को 'औकात' बता रहे थे, वे अब अपमान करने या माफी मांगने आए हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि होली और भगोरिया जैसे पर्वों के दौरान मतभेद भले रहें, लेकिन मनभेद भुलाकर प्रेम के रंग लगाने चाहिए।
इसके अलावा मध्य प्रदेश के दिग्गज नेताओं का अंदाज भी बदला-बदला नजर आ रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने फूल-मालाओं और स्मृति-चिह्नों से स्वागत लेना बंद कर दिया है और लोगों से पेड़ लगाकर तस्वीर भेंट करने की अपील की। दिग्विजय सिंह ने खुद को 'कुछ भी नहीं' बताते हुए राजा-वाजा कहने से मना किया और मंच पर न बैठने की कसम ली (हालांकि राहुल गांधी के दौरे पर टूट गई)। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने खुद को 'डिब्बा मंत्री' कहकर रोचक अंदाज में विभाग की बात की।
