भोपाल, जीतेन्द्र यादव। मध्य प्रदेश में निगम-मंडल की नियुक्तियों को लेकर सियासत तेज हो गई है। कांग्रेस नेता एवं पूर्व मंत्री पीसी शर्मा ने बीजेपी सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा है कि सरकार इन नियुक्तियों को करने में पूरी तरह असमर्थ साबित हो रही है। उनका कहना है कि पिछले एक साल से इन नियुक्तियों की चर्चा चल रही है, लेकिन अब तक केवल दो-तीन आयोगों में ही नियुक्तियाँ हो पाई हैं। शर्मा ने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी के भीतर गुटबाजी और खींचतान इस देरी का मुख्य कारण है, क्योंकि कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए नेता भी पदों में बराबर हिस्सेदारी की मांग कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि सरकार इन नियुक्तियों को चुनाव से ठीक पहले ही करेगी।
इसी दौरान कैबिनेट मंत्री नागर सिंह चौहान के भाई से जुड़े महिला अधिकारी के साथ बदसलूकी के मामले पर भी उन्होंने कड़ी प्रतिक्रिया दी। शर्मा ने इसे 12वीं ऐसी घटना बताते हुए कहा कि लगातार मंत्रियों के परिजन अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ दुर्व्यवहार कर रहे हैं। उन्होंने “नारी वंदन” जैसे नारों पर सवाल उठाते हुए कहा कि एक तरफ महिला सम्मान की बात की जाती है, वहीं दूसरी ओर इस तरह की घटनाएं सामने आती हैं। उन्होंने IAS और IPS अधिकारियों से अपील की कि वे केवल माफी पर निर्भर न रहें, बल्कि सख्त कानूनी कार्रवाई करें, अन्यथा भविष्य में युवा सिविल सेवाओं में आने से हिचकेंगे।
किसानों के मुद्दे पर भी शर्मा ने सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि बीजेपी ने चुनाव के दौरान किसानों की आय दोगुनी करने का वादा किया था, लेकिन आज हालत इसके उलट है। गेहूं के लिए 2700 रुपये एमएसपी का वादा किया गया था, लेकिन 16 मार्च से 25 अप्रैल तक खरीदी नहीं की गई। उन्होंने मांग की कि जिन किसानों ने कम दाम पर गेहूं बेच दिया है, उन्हें अंतर राशि का मुआवजा दिया जाए और डिफॉल्टर किसानों का ब्याज माफ किया जाए। शर्मा ने चेतावनी दी कि यदि एक सप्ताह में मांगें पूरी नहीं हुईं तो जीतू पटवारी के नेतृत्व में प्रदेशभर में हाईवे जाम किए जाएंगे और “नरेंद्र मोदी की गारंटी” की सच्चाई जनता के सामने लाई जाएगी।
वहीं, धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री द्वारा चार बच्चे पैदा करने वाले बयान पर भी शर्मा ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर को इस तरह के बयान देने से बचना चाहिए। शर्मा ने कहा कि देश पहले ही जनसंख्या के मामले में चीन को पीछे छोड़ चुका है, ऐसे में रोजगार, शिक्षा और संसाधनों की चुनौती को देखते हुए इस तरह की सलाह देना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि आध्यात्मिक व्यक्तित्व को समाज को संतुलित और जिम्मेदार दिशा देने वाली बातें करनी चाहिए।

