153 करोड़ की 'चंबल सूक्ष्म सिंचाई परियोजना' फेल! कागजों पर लोकार्पण

Advertisement
35 गांवों के किसानों का फूटा गुस्सा
पाइपलाइन में लीकेज और अधूरे काम ने खोली भ्रष्टाचार की पोल
कलेक्टर की चेतावनी का भी असर नहीं
श्योपुर, उत्तम सिंह। मध्य प्रदेश सरकार द्वारा श्योपुर और बड़ौदा क्षेत्र के किसानों की तकदीर बदलने के लिए मंजूर की गई 153 करोड़ 57 लाख रुपये की चंबल सूक्ष्म सिंचाई परियोजना भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ती नजर आ रही है। साल 2018 में शुरू हुई इस महत्वाकांक्षी योजना का लोकार्पण 2023 में बड़ी धूमधाम से किया गया था, लेकिन हकीकत यह है कि आज भी 35 गांवों के किसानों के खेतों तक पानी की एक बूंद नहीं पहुँची है।
भ्रष्टाचार के 'मगरमच्छों' पर निशाना
किसानों ने आज एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर विभाग और ठेकेदारों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। किसानों का कहना है कि परियोजना में भारी भ्रष्टाचार हुआ है। खेतों में जो पाइपलाइन बिछाई गई है, वह जगह-जगह से लीकेज है और काम अभी भी अधूरा पड़ा है। किसानों ने तीखे लहजे में कहा कि इस घोटाले में 'बड़े-बड़े मगरमच्छ' शामिल हैं, जिनके नामों का खुलासा वे सही समय आने पर करेंगे।
कलेक्टर की चेतावनी भी बेअसर
मामले की गंभीरता को देखते हुए श्योपुर कलेक्टर ने पिछले दिनों अधिकारियों के साथ बैठक की थी। कलेक्टर ने सख्त निर्देश देते हुए कहा था कि "10 दिन में इसे ठीक करो, नहीं तो रगड़ दूंगा"। बावजूद इसके, जमीनी स्तर पर कोई सुधार नहीं हुआ है। अधिकारियों की इस मनमानी और कलेक्टर के आदेश की अवहेलना ने किसानों के आक्रोश को और बढ़ा दिया है।
2017 का आंदोलन और 25 तारीख की महापंचायत
उल्लेखनीय है कि श्योपुर के इस क्षेत्र में वाटर लेवल काफी नीचे है, जिसके कारण हजारों एकड़ जमीन बंजर पड़ी रहती थी। इसी समस्या को लेकर 2017 में किसानों ने भूख हड़ताल और लंबा आंदोलन किया था, जिसके दबाव में सरकार ने यह योजना मंजूर की थी। अब एक बार फिर किसान आंदोलन की राह पर हैं। किसानों ने घोषणा की है कि आने वाली 25 तारीख को एक महापंचायत बुलाई गई है, जिसमें भ्रष्टाचार के खिलाफ अगले बड़े कदम का निर्णय लिया जाएगा।
