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होली से पहले बसों की हड़ताल: नई परिवहन नीति से मालिक नाराज

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PeptechTime
26 फ़रवरी 2026, 05:16 am IST
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भोपाल। होली के त्योहार से ठीक पहले मध्य प्रदेश में यात्रियों के लिए बड़ी मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं। मध्य प्रदेश बस ऑपरेटर्स एसोसिएशन ने सरकार की नई परिवहन नीति के विरोध में 2 मार्च से अनिश्चितकालीन हड़ताल का ऐलान किया है। इस हड़ताल में प्रदेश की लगभग 20 हजार बसें शामिल होंगी, जिसमें 12,780 परमिट वाली और 7 हजार से अधिक कॉन्ट्रैक्ट वाली बसें हैं। हड़ताल सुबह 6 बजे से शुरू होगी, जिससे 55 जिलों में बस सेवाएं पूरी तरह ठप हो सकती हैं।


यह फैसला होली के मौके पर लिया गया है, जब लोग बड़े पैमाने पर अपने घरों की ओर रवाना होते हैं। यात्रियों पर सबसे ज्यादा असर पड़ेगा, क्योंकि बसें न चलने से उन्हें वैकल्पिक साधनों का सहारा लेना पड़ेगा। ट्रैवल्स की गाड़ियां और कैब ही मुख्य विकल्प बचेंगे, जहां भीड़ और त्योहार के कारण किराए में भारी वृद्धि की संभावना है। उदाहरण के लिए, भोपाल से होशंगाबाद का सामान्य बस किराया 100 रुपये है, लेकिन हड़ताल के दौरान कैब में चार लोगों के साथ प्रति व्यक्ति किराया 500-600 रुपये तक पहुंच सकता है, यानी सामान्य से 5 से 7 गुना अधिक। अन्य रूटों पर भी यही स्थिति होने की आशंका है।


बस ऑपरेटर्स की मुख्य शिकायत नई परिवहन नीति से है, जिसके तहत सरकार पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल पर 7 कंपनियों को टेंडर सौंपेगी। इन कंपनियों के माध्यम से लोकल रूटों के परमिट दिए जाएंगे, किराया कंपनियां तय करेंगी और बस ऑपरेटर्स से 10 प्रतिशत तक कमीशन वसूला जाएगा। बस, ड्राइवर, कंडक्टर और ईंधन की जिम्मेदारी ऑपरेटर्स की ही रहेगी। एसोसिएशन के महामंत्री जयकुमार जैन ने बताया कि फिलहाल प्रति किलोमीटर किराया 1.25 रुपये है, जबकि नई नीति में इसे 1.75 रुपये करने का प्रस्ताव है। उन्होंने कहा कि एसोसिएशन ने सरकार को ज्ञापन सौंपा है और मांगें नहीं मानी गईं तो प्रदर्शन जारी रहेगा। उनका कहना है कि लोगों को परेशान करने का कोई इरादा नहीं, लेकिन नीति उनके हितों के खिलाफ है।


दूसरी ओर, प्रदेश के परिवहन मंत्री राव उदय प्रताप सिंह ने विधानसभा के बजट सत्र में स्पष्ट किया कि नई नीति से बस ऑपरेटर्स का कोई अहित नहीं होगा। बस और कंडक्टर उनके ही रहेंगे, सिर्फ सुपरविजन और निगरानी सरकार की होगी। उन्होंने बताया कि वर्तमान में प्रदेश में 14 हजार बसें चल रही हैं, जबकि जरूरत 16 हजार की है। मंत्री के अनुसार, नीति से व्यवस्था बेहतर और व्यवस्थित होगी, तथा किसी का नुकसान नहीं होने वाला है।


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