टोकन की गड़बड़ी से बदली अस्थियां, 3 घंटे बाद लौटाने पर शांत हुआ विवाद

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इंदौर। इंदौर के पंचकुइया मुक्तिधाम में शनिवार को अस्थियां गायब होने को लेकर जमकर हंगामा हो गया। दरअसल मुक्तिधाम से एक ही नंबर के तीन टोकन जारी कर दिए गए थे, जिसके कारण एक परिवार दूसरे परिवार की अस्थियां लेकर चला गया। करीब तीन घंटे बाद अस्थियां वापस लौटाने पर मामला शांत हुआ।
जानकारी के मुताबिक विश्वकर्मा समाज के समाजसेवी मदनलाल विश्वकर्मा (55) निवासी गौरी शंकर नगर का शुक्रवार को बीमारी के चलते निधन हो गया था। शनिवार को परिवार के लोग अस्थि संचय के लिए मुक्तिधाम पहुंचे, लेकिन जिस स्थान पर अंतिम संस्कार किया गया था वहां अस्थियां नहीं मिलीं। इससे परिजन घबरा गए और उन्होंने मुक्तिधाम पर मौजूद कर्मचारियों से जानकारी मांगी।
परिवार के नजदीकी मुकेश शर्मा के अनुसार जब रजिस्टर की जांच की गई तो पता चला कि मुक्तिधाम से एक ही नंबर (13) के तीन टोकन अलग-अलग परिवारों को दे दिए गए थे। इसी वजह से दूसरा परिवार गलती से स्व. विश्वकर्मा की अस्थियां लेकर चला गया। बाद में उन्हें फोन कर जानकारी दी गई, जिसके बाद वे करीब तीन घंटे बाद अस्थियां लेकर मुक्तिधाम लौटे और संबंधित परिवार को सौंप दीं। इसके बाद विश्वकर्मा परिवार अस्थियां विसर्जन के लिए रवाना हुआ।
उधर दूसरी ओर सुनील चौबे (65) निवासी नगीन नगर के परिवार के साथ भी यही स्थिति बनी। चौबे का 5 मार्च को निधन हुआ था और शनिवार को उनका भी अस्थि संचय था। उनके बेटे अजय चौबे जब टोकन नंबर 13 के आधार पर अस्थियां लेकर खेड़ी घाट विसर्जन के लिए रवाना हुए तो मुक्तिधाम से फोन आया कि वे गलत अस्थियां लेकर चले गए हैं। उस समय वे घाट के पास पहुंच चुके थे, जिसके बाद उन्हें वापस इंदौर लौटना पड़ा और अस्थियां विश्वकर्मा परिवार को सौंपी।
मामले में परिजनों ने मुक्तिधाम के कर्मचारियों पर लापरवाही का आरोप लगाया और पुलिस को सूचना दी। सूचना मिलने पर डायल-100 की टीम मौके पर पहुंची। राजेश दंडोतिया ने कहा कि यदि संबंधित पक्ष शिकायत करता है तो मामले में वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
वहीं पंचकुइयां मोक्ष विकास समिति के अध्यक्ष वैभव बाहेती ने घटना पर खेद जताया है। उनका कहना है कि कर्मचारी की मानवीय भूल के कारण 12 की जगह 13 नंबर के टोकन जारी हो गए, जिससे यह गड़बड़ी हुई। कर्मचारी को चेतावनी दी गई है कि भविष्य में ऐसी गलती दोबारा न हो।
