भोपाल। मध्य प्रदेश के बैतूल जिले के मुलताई में वर्ष 2007 में हुए बहुचर्चित पारधी दंपति हत्याकांड और इससे जुड़ी हिंसा के मामले में शुक्रवार को एमपी-एमएलए विशेष अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया। अदालत ने पूर्व पीएचई मंत्री तथा कांग्रेस के पूर्व विधायक सुखदेव पांसे, वर्तमान बैतूल जिला पंचायत अध्यक्ष राजा पवार सहित कुल 14 आरोपियों को हत्या, आगजनी, दंगा भड़काने और अन्य सभी गंभीर आरोपों से बरी कर दिया है। यह फैसला पर्याप्त साक्ष्यों के अभाव में दिया गया है।


यह मामला सितंबर 2007 का है, जब मुलताई तहसील के ग्राम चौथिया में पारधी समुदाय के डेरे पर हिंसा, आगजनी और तोड़फोड़ की घटना हुई थी। इस दौरान पारधी समुदाय के बोंदरु पारधी और उनकी पत्नी का शव एक कुएं में मिला था। इस सनसनीखेज घटना के बाद पुलिस ने तत्कालीन विधायक सुखदेव पांसे, राजा पवार और अन्य ग्रामीणों के खिलाफ हत्या, दंगा भड़काने तथा आगजनी की धाराओं में मामला दर्ज किया था। मामले की जांच बाद में सीबीआई को सौंपी गई थी।


इस हाई-प्रोफाइल मामले में कुल 16 ग्रामीण आरोपी बनाए गए थे, जिनमें से दो की मौत हो चुकी है। लगभग 19 साल तक चली लंबी कानूनी लड़ाई के बाद 21वें अपर सत्र न्यायाधीश एवं विशेष न्यायाधीश (एमपी-एमएलए) स्वयं प्रकाश दुबे ने शुक्रवार को फैसला सुनाते हुए सभी आरोपियों को दोषमुक्त घोषित कर दिया।


फैसले के बाद बचाव पक्ष के वरिष्ठ अधिवक्ता वी.के. सक्सेना और संजय रावत ने इसे सत्य की जीत करार दिया। सुखदेव पांसे के समर्थकों में फैसले के बाद खुशी की लहर दौड़ गई है। पूरे प्रदेश में इस फैसले पर काफी चर्चा हो रही है, क्योंकि यह लंबे समय से चल रहे विवादास्पद मामले का अंत माना जा रहा है।