छतरपुर। सिद्ध पीठ बागेश्वर धाम में इस बार का श्री हनुमान जन्मोत्सव अपने आप में अनूठा था। बागेश्वर धाम पीठाधीश पं धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की मंशानुरूप बालाजी की कृपा से महोत्सव को दिव्य और भव्य बनाया गया। एक साथ 21 हजार लोगों ने महा आरती में अपनी उपस्थिति दी। हालांकि इस मौके पर बड़ी संख्या में देसी विदेशी धर्म प्रेमी उपस्थित रहे। सायं काल में श्री हनुमान जी के चरित्र पर चर्चा करने श्री धाम वृंदावन से आए पुंडरीक गोस्वामी जी ने कहा कि हनुमान जी सेवा, भक्ति और समर्पण का प्रतिरूप है। वातावरण जय श्री राम तथा जय बजरंगबली के जयघोषों से गूंज उठा। वही बागेश्वर महाराज ने कहा कि हनुमान चालीसा चाहिए सीख मिलती है कि ऐसा कोई कार्य नहीं है जो हनुमान जी की कृपा से ना हो सके।भोजपुरी कलाकार रितेश पांडे के अलावा अंकुश तथा राजा की भजन संध्या में लोग भाव विभोर हो गए।

श्री हनुमान के चरित्र की चर्चा करते हुए कथा व्यास पुंडरीक गोस्वामी जी ने पहले श्री रघुनाथ की चर्चा की। कथा व्यास श्री गोस्वामी ने कहा कि बाह्य विकारों को समाप्त करने के लिए हमें अपने भीतर अग्नि स्वरूप रघुनाथ को प्रज्वलित करना होगा। उन्होंने बताया कि सच्ची उपासना केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है बल्कि यह आत्मिक परिवर्तन की प्रक्रिया है।

कथा के दौरान उन्होंने उपासना का गूढ़ अर्थ समझाते हुए कहा कि उपासना का अर्थ है सरकना अर्थात बुद्धि से विवेक की ओर, अंतःकरण से चित्त वृत्ति की ओर और आत्मा से परमात्मा की ओर गमन करना ही सच्ची उपासना है। श्री हनुमंत कथा का श्रवण करते हुए श्रद्धालु भक्ति भाव में डूब गए। कथा व्यास ने भगवान हनुमान के जीवन प्रसंगों के माध्यम से सेवा, समर्पण और भक्ति का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि यदि मनुष्य अपने जीवन में हनुमान जी के आदर्शों को अपनाता है तो वह हर संकट से पार पा सकता है। कथा के पहले दुनिया के सबसे छोटे ग्रंथ श्री हनुमान चालीसा का संगीतमय वाचन हुआ। गुजरात से आई टीम की ओर से प्रस्तुति दी गई।
मानस मर्मज्ञों ने रामचरितमानस के गूढ़ अर्थ समझाए
श्री हनुमान जन्मोत्सव के अवसर पर श्री रामचरितमानस सम्मेलन का भी आयोजन किया गया। आचार्य रोहित रिछारिया महाराज ने बताया कि इस अवसर पर बुंदेलखंड के प्रख्यात मानस मर्मज्ञ बागेश्वर धाम पधारे, उनकी ओर से रामचरितमानस के विभिन्न प्रसंगों का गूढ़ अर्थ समझाया गया। सम्मलेन में रामदास महाराज महंत मघेरे हनुमान मंदिर, महावीर दास त्यागी पारीछा, हरिओम दास झांसी, राजेंद्र दास मेहंदी बाग झांसी, आचार्य शशि शेखर, आचार्य अंकुश जी महाराज औरैया, गुरु प्रसाद महाराज पचोखरा, आचार्य राजेंद्र पाठक उरई, दीदी नीलम गायत्री, दीदी कमलेश्वरी देवी एट, रामजीवन पश्तोर निवाड़ी, गोपाल दास महाराज शिवपुरी, नीलमणि दास दमोह, मृदुल बिहारी छतरपुर, बृजेश महाराज पीतांबरा पीठ छतरपुर, तेजस महाराज जालौन ने अपनी वाणी से रामचरितमानस के प्रसंगों का रसपान कराया।




