छतरपुर, (सुबोध त्रिपाठी)। जिले के सरबई ग्राम पंचायत में भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी के एक बड़े खेल का उस वक्त पटाक्षेप हो गया, जब प्रभारी कलेक्टर नमः शिवाय अरजरिया ने कड़ा रुख अपनाते हुए पंचायत सचिव को पद से हटा दिया। दरअसल, सरबई पंचायत में पदस्थ सचिव भैयालाल केवट का एक ऑडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ था, जिसमें वह ग्राम पंचायत के ही सरपंच से कथित तौर पर एक लाख रुपये की रिश्वत की मांग कर रहे थे। इस ऑडियो के सामने आने के बाद प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया था और सरकारी तंत्र की शुचिता पर सवाल खड़े हो रहे थे। मामले की गंभीरता और प्रथम दृष्टया साक्ष्यों को देखते हुए प्रभारी कलेक्टर ने भ्रष्टाचार के प्रति 'जीरो टॉलरेंस' की नीति अपनाते हुए सचिव के निलंबन का आदेश जारी कर दिया है।
वायरल ऑडियो में हो रही बातचीत ने यह साफ कर दिया था कि विकास कार्यों की आड़ में किस तरह बंदरबांट और रिश्वतखोरी का जाल बिछाया गया था। जैसे ही यह ऑडियो जिला प्रशासन के संज्ञान में आया, प्रभारी कलेक्टर नमः शिवाय अरजरिया ने इसकी जांच के निर्देश दिए और सचिव भैयालाल केवट की भूमिका को संदिग्ध पाया। पद का दुरुपयोग और शासकीय गरिमा के प्रतिकूल आचरण करने के आरोप में सचिव को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि अनुशासनहीनता और भ्रष्टाचार के मामलों में किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इस कार्रवाई से जिले की अन्य पंचायतों में भी हड़कंप मच गया है, जहाँ कमीशनखोरी के मामले अक्सर दबे रह जाते हैं।
निलंबन की इस कार्रवाई के बाद अब विभाग इस बात की भी जांच कर रहा है कि क्या सचिव द्वारा पहले भी इस तरह की वसूली की गई है या इस खेल में कोई और भी शामिल है। प्रभारी कलेक्टर के इस त्वरित निर्णय की क्षेत्र में काफी सराहना हो रही है, क्योंकि अक्सर ऐसे मामलों में जांच के नाम पर लंबी फाइलें खिंचती रहती हैं। फिलहाल भैयालाल केवट को सरबई से हटाकर मुख्यालय अटैच कर दिया गया है और मामले की विस्तृत विभागीय जांच शुरू कर दी गई है। इस आदेश ने जिले के तमाम पंचायत कर्मियों को स्पष्ट संदेश दे दिया है कि यदि जनता की गाढ़ी कमाई में सेंध लगाने की कोशिश की गई, तो अंजाम इसी तरह की सख्त कार्रवाई होगा।



