छतरपुर, विनोद मिश्रा। छतरपुर जिले में बिना अनुमति और नियमों को ताक पर रखकर विकसित की जा रही अवैध कॉलोनियों के खिलाफ प्रशासन ने अब तक की सबसे बड़ी घेराबंदी शुरू कर दी है। टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (TNCP) और रेरा (RERA) की अनिवार्य अनुमतियों के बिना चल रहे प्लॉटिंग प्रोजेक्ट्स को जिला प्रशासन ने अवैध घोषित कर दिया है। ताजा जांच के बाद लगभग 46 कॉलोनियों पर 'अवैध' की मुहर लग चुकी है, जिससे भू-माफियाओं और रसूखदार कॉलोनाइजरों में हड़कंप मच गया है।


जांच के घेरे में 100 से ज्यादा शिकायतें


प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, जिले के विभिन्न क्षेत्रों से अवैध प्लॉटिंग और धोखाधड़ी की 100 से अधिक शिकायतें प्राप्त हुई थीं। अनुविभागीय अधिकारी (SDM) कार्यालय और कलेक्टर न्यायालय में चल रही सुनवाई के बाद अब तक 46 कॉलोनियों को चिन्हित कर अवैध करार दिया गया है। हाल ही में 4 नए मामलों में से 2 को तत्काल प्रभाव से अवैध घोषित किया गया है, जबकि अन्य मामलों में अपील और सुनवाई की प्रक्रिया जारी है।


ग्रामीण क्षेत्रों तक फैला अवैध कारोबार


यह कार्रवाई केवल शहर तक सीमित नहीं है। प्रशासन ने ग्रामीण अंचलों में भी पैनी नजर रखी है। सरानी, धमोरा, चंद्रपुरा, गुरैया, पलोठा, मुवासी, मोराहा, बगौता, ढडारी, गौरगांव, पठापुर, बरकोंहा और गठेवरा जैसे गांवों में बड़े पैमाने पर अवैध कॉलोनियों की जांच की जा रही है। नियमों के मुताबिक, किसी भी प्रोजेक्ट के लिए नगर पालिका, पीडब्ल्यूडी, वन विभाग और आरईएस सहित कई विभागों की एनओसी (NOC) अनिवार्य है, जिसका पालन नहीं किया गया।


साठगांठ के आरोप और प्रशासनिक चुनौतियां


एक तरफ जहाँ प्रशासन सख्त कार्रवाई का दावा कर रहा है, वहीं दूसरी ओर विभागीय कर्मचारियों और भू-माफियाओं के बीच 'साठगांठ' की खबरें भी सुर्खियां बटोर रही हैं। सूत्रों का कहना है कि कई रसूखदारों की फाइलें महीनों से अधिकारियों की टेबल पर धूल खा रही हैं। इस सुस्त प्रक्रिया के कारण अवैध निर्माण को फलने-फूलने का मौका मिल रहा है। हालांकि, वरिष्ठ अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि अब लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी और दोषियों पर सीधे एफआईआर (FIR) दर्ज की जाएगी।


निवेशकों के लिए चेतावनी


प्रशासन ने आम जनता से अपील की है कि जीवन भर की कमाई किसी भी प्लॉट या मकान में लगाने से पहले उसके वैध दस्तावेजों (TNCP डायवर्जन और RERA रजिस्ट्रेशन) की बारीकी से जांच करें। अवैध कॉलोनियों में निवेश करने पर न केवल प्रशासन द्वारा तोड़फोड़ की जा सकती है, बल्कि भविष्य में वहां मूलभूत सुविधाओं (बिजली-पानी-सड़क) का मिलना भी असंभव होगा।