गुवाहाटी, 24 मई । केंद्रीय युवा मामले और खेल राज्य मंत्री रक्षा खडसे ने रविवार को गुवाहाटी में खेलो इंडिया स्टेट सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (केआईएससीई) असम और हाई परफॉर्मेंस सेंटर का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने एथलीट्स, कोचों, खेल विज्ञान विशेषज्ञों और अधिकारियों से बातचीत की और पूर्वोत्तर में बढ़ रहे हाई-परफॉर्मेंस खेल इकोसिस्टम का जायजा लिया।

रक्षा खडसे ने हाई परफॉर्मेंस सेंटर (एचपीसी) में विभिन्न प्रशिक्षण और रिहैबिलिटेशन फैसिलिटी का दौरा किया, जिनमें स्पोर्ट्स साइंस लेबोरेटरी, रिकवरी और रिहैबिलिटेशन यूनिट्स, शारीरिक और बायोमैकेनिकल मूल्यांकन सुविधाएं और एथलीट सहायता प्रणालियां शामिल थीं। इस दौरे ने भारत के खेल इकोसिस्टम में खेल विज्ञान, प्रौद्योगिकी और डेटा-आधारित एथलीट विकास के बढ़ते जुड़ाव को उजागर किया।

इस दौरान मंत्री के साथ खेल और युवा कल्याण विभाग के विशेष सचिव कौसर जमील हिलाली, खेल और युवा कल्याण विभाग के निदेशक अंकुर भराली, साई गुवाहाटी के क्षेत्रीय निदेशक डीके मित्तल, केआईएससीई असम के हाई परफॉर्मेंस मैनेजर और खेल और युवा कल्याण विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।

विभिन्न खेलों से जुड़े एथलीट्स से बातचीत करते हुए, रक्षा खडसे ने उनके समर्पण और प्रतिबद्धता को सराहा और उन्हें अनुशासन और दृढ़ संकल्प के साथ उत्कृष्टता की ओर लगातार प्रयास करते रहने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने भारतीय एथलीट्स के लिए जमीनी स्तर पर खेल के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और विश्व स्तरीय प्रशिक्षण वातावरण बनाने पर सरकार के निरंतर फोकस पर भी जोर दिया।

इस मौके पर रक्षा खडसे ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में, भारत खेल के बुनियादी ढांचे, एथलीट सहायता प्रणालियों और वैज्ञानिक प्रशिक्षण पद्धतियों में एक परिवर्तनकारी विस्तार देख रहा है। उन्होंने कहा कि खेलो इंडिया स्टेट सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (केआईएससीई) असम और हाई परफॉर्मेंस सेंटर जैसे केंद्र प्रतिभा को निखारने और एथलीट्स को अंतरराष्ट्रीय सफलता के लिए तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

हाई परफॉर्मेंस सेंटर इस क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण खेल विज्ञान और पुनर्वास सुविधा के रूप में उभरा है, जो इंजरी मैनेजमेंट, रिकवरी, शारीरिक परीक्षण, गति विश्लेषण और प्रदर्शन बढ़ाने के लिए आधुनिक प्रणालियों से सुसज्जित है।

रक्षा खडसे ने खेलो इंडिया इकोसिस्टम के तहत जारी एथलीट विकास कार्यक्रमों का भी जायजा लिया। उन्होंने पूर्वोत्तर के युवा एथलीट्स के लिए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने हेतु मार्ग को मजबूत करने के महत्व पर चर्चा की।