भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में आयोजित एक उच्चस्तरीय ऊर्जा कार्यशाला को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राज्य के ऊर्जा क्षेत्र को लेकर कई बड़ी घोषणाएं की हैं। मुख्यमंत्री ने बताया कि ग्वालियर-चंबल अंचल के मुरैना जिले में स्थापित की गई 'सोलर इलेक्ट्रिसिटी स्टोरेज परियोजना' के जरिए प्रदेशवासियों को महज ₹2.70 प्रति यूनिट की रियायती दर से सबसे सस्ती बिजली उपलब्ध कराई जाएगी। इसके साथ ही नीमच-मंदसौर क्षेत्र में देश का सबसे बड़ा ग्रीन एनर्जी प्लांट भी आकार ले रहा है, जिसका उद्देश्य प्रदेश को शत-प्रतिशत सस्ती और हरित ऊर्जा की ओर ले जाना है।
मुरैना प्रोजेक्ट से मिलेगी सबसे सस्ती बिजली; ₹2.70 प्रति यूनिट दर तय
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मुरैना जिले में स्थापित सोलर इलेक्ट्रिसिटी स्टोरेज प्रोजेक्ट के माध्यम से राज्य सरकार जनता को बिजली की ऊंची दरों से राहत देने जा रही है। इस अत्याधुनिक परियोजना के तहत बिजली की दर मात्र ₹2.70 प्रति यूनिट रखी गई है। ऊर्जा क्षेत्र में यह कदम आम नागरिकों और उद्योगों के लिए वित्तीय बोझ को काफी हद तक कम करने में मददगार साबित होगा।
नीमच-मंदसौर में बन रहा 2000 मेगावाट का देश का सबसे बड़ा प्लांट
ग्रीन एनर्जी के क्षेत्र में मध्य प्रदेश के बढ़ते कदमों का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि 'ग्रीनको' (Greenko) कंपनी द्वारा नीमच और मंदसौर क्षेत्र में 2,000 मेगावाट क्षमता का एक विशाल ऊर्जा प्लांट स्थापित किया जा रहा है। आमतौर पर इतनी बड़ी मेगा परियोजनाओं को पूरा होने में 4 से 6 साल का लंबा समय लगता है, लेकिन राज्य सरकार की नीतियों के चलते यह कार्य महज ढाई साल के रिकॉर्ड समय में पूरा होने जा रहा है।
बिजली किल्लत वाले राज्य से 'पावर सरप्लस' स्टेट बनने का सफर
राज्य की बिजली उत्पादन क्षमता में आए ऐतिहासिक बदलाव के आंकड़े साझा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि 1956 में मध्य प्रदेश के गठन से लेकर वर्ष 2002-03 तक राज्य की कुल बिजली उत्पादन क्षमता केवल 5,000 मेगावाट थी। वर्तमान में यह क्षमता बढ़कर 32,000 मेगावाट तक पहुंच चुकी है, जिसमें से लगभग 30 प्रतिशत हिस्सा पूरी तरह से नवकरणीय एवं हरित ऊर्जा (सोलर, विंड और पंप स्टोरेज) से आ रहा है। उन्होंने कहा कि कभी लंबे पावर कट झेलने वाला मध्य प्रदेश आज पूरी तरह 'बिजली फुल स्टेट' बन चुका है।
महंगे बिजली टैरिफ के बीच आम जनता को कैसे मिलेगी राहत?
मध्य प्रदेश विद्युत नियामक आयोग (MPERC) द्वारा वित्त वर्ष 2026-27 के लिए बिजली दरों में की गई 4.8 प्रतिशत की बढ़ोतरी और फ्यूल एडजस्टमेंट सरचार्ज (FPPAS) के अतिरिक्त बोझ के बीच यह नई नीति जनता के लिए बड़ी राहत लेकर आएगी: अप्रैल 2026 से लागू हुई नई दरों और सरचार्ज के मुकाबले ₹2.70 प्रति यूनिट का नया सोलर टैरिफ बेहद कम है, जिससे भविष्य में ग्रिड की औसत बिजली खरीद लागत (APPC) कम होगी।
जैसे ही यह सस्ती सोलर स्टोरेज बिजली राज्य के पावर ग्रिड में बड़े पैमाने पर शामिल होगी, आम उपभोक्ताओं के मासिक बिलों में सीधी गिरावट देखने को मिलेगी। राज्य में अब तक लगभग 42 लाख स्मार्ट मीटर स्थापित किए जा चुके हैं। आगामी दिनों में दिन के समय उत्पादित होने वाली सस्ती सोलर बिजली का लाभ स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं को विशेष टैरिफ छूट के रूप में दिए जाने की योजना है। थर्मल पावर पर निर्भरता कम होने और हरित ऊर्जा का दायरा बढ़ने से भविष्य में बिजली डिस्कॉम कंपनियों के घाटे में कमी आएगी, जिससे सालाना आधार पर होने वाली टैरिफ बढ़ोतरी पर ब्रेक लगेगा।
24 घंटे अक्षय ऊर्जा का लक्ष्य और वैश्विक प्रतिबद्धता
कार्यक्रम में वर्चुअली जुड़े राज्य के ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने कहा कि यह कार्यशाला बिजली वितरण कंपनियों को वित्तीय रूप से सक्षम और मजबूत बनाने में मील का पत्थर साबित होगी। वहीं मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि भारत जी-20 देशों में इकलौता ऐसा देश बना है, जिसने समय से पहले 50 प्रतिशत ग्रीन एनर्जी उत्पादन का लक्ष्य हासिल किया है। सौर ऊर्जा के व्यापक इस्तेमाल से देश में कार्बन उत्सर्जन में 20 करोड़ टन से अधिक की भारी गिरावट दर्ज की गई है।




