भोपाल, पंकज यादव। राष्ट्रपति भवन में आयोजित भव्य नागरिक अलंकरण समारोह में मध्य प्रदेश की चार महान विभूतियों को देश के प्रतिष्ठित 'पद्मश्री' सम्मान से नवाजा जाना पूरे प्रदेश सहित विशेष रूप से बुंदेलखंड अंचल के लिए गौरव का क्षण बन गया है। साहित्य, जल संरक्षण, पुरातत्व और पारंपरिक बुंदेली युद्ध कला को अपनी जिंदगी सौंपने वाले इन जमीनी नायकों की कहानियां हर नागरिक को प्रेरित करने वाली हैं। इस बार के पद्म पुरस्कारों की सबसे खास बात यह रही कि इनमें कोई बड़े फिल्मी सितारे या उद्योगपति शामिल नहीं हैं, बल्कि वे लोग हैं जिन्होंने निस्वार्थ भाव से धरातल पर रहकर समाज की तस्वीर बदलने का काम किया है।


वरिष्ठ लेखक और पत्रकार कैलाश चंद्र पंत

भोपाल के रहने वाले वरिष्ठ लेखक और पत्रकार कैलाश चंद्र पंत को साहित्य और शिक्षा के क्षेत्र में उनके अतुलनीय योगदान के लिए पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। श्री पंत युवावस्था से ही सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ लेखन और प्रगतिशील पत्रकारिता से जुड़े रहे हैं। उन्होंने अपने धारदार लेखों, पुस्तकों और सामाजिक विचारों के जरिए समाज में चेतना जगाने का एक लंबा सफर तय किया है। शिक्षा और साहित्य को आम जनमानस, विशेषकर युवाओं तक सरल भाषा में पहुंचाने के उनके इसी जीवनभर के प्रयास को आज राष्ट्रीय स्तर पर यह बड़ा गौरव मिला है, जिससे प्रदेश के साहित्य जगत में हर्ष की लहर है।


बैतूल जिले के मोहन नागर

जल संकट के इस दौर में मध्य प्रदेश के बैतूल जिले के मोहन नागर आज पूरे देश के लिए एक बड़ी मिसाल बनकर उभरे हैं, जिन्हें क्षेत्र के लोग आदर से “वॉटर मैन ऑफ बैतूल” (बैतूल के जल पुरुष) के नाम से पुकारते हैं। मोहन नागर को जल संरक्षण और समाज सेवा के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव लाने के लिए पद्मश्री सम्मान दिया जाएगा। उन्होंने ग्रामीण और सुदूर आदिवासी अंचलों में घूम-घूमकर लोगों को वर्षा जल संचयन (वाटर हार्वेस्टिंग) और भूजल स्तर को सुधारने के वैज्ञानिक तरीकों के प्रति जागरूक किया। उनके द्वारा शुरू किए गए “गंगा अवतरण अभियान” ने देखते ही देखते एक विशाल जन आंदोलन का रूप ले लिया, जिसने सैकड़ों गांवों को जल संकट से उबारा है।


इतिहास को सहेजने वाले डॉ. नारायण व्यास

पुरातत्व के क्षेत्र में भारत के गौरवशाली इतिहास को सहेजने वाले डॉ. नारायण व्यास को उनके चार दशकों के अद्वितीय कार्यों के लिए पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। डॉ. व्यास ने लगभग चालीस वर्षों तक देश के विभिन्न हिस्सों में ऐतिहासिक स्थलों की खोज, प्राचीन स्मारकों की खुदाई और उनके वैज्ञानिक संरक्षण में अपना जीवन खपा दिया। इतिहास और पुरातत्व के क्षेत्र में नई पीढ़ी के शोधकर्ताओं व विद्यार्थियों को तैयार करने में भी उनका बहुत बड़ा योगदान रहा है। इतिहासकारों का मानना है कि डॉ. व्यास द्वारा सहेजी गई धरोहरें आने वाली पीढ़ियों को भारत के वास्तविक और समृद्ध इतिहास को समझने में एक मजबूत मार्गदर्शक का काम करेंगी।


बुंदेलखंड के ऐतिहासिक छत्रसाल बुंदेला अखाड़े से जुड़े भगवानदास रायकवार

बुंदेलखंड अंचल के लिए सबसे गौरव का क्षण सागर जिले से आया है, जहाँ के ऐतिहासिक छत्रसाल बुंदेला अखाड़े से जुड़े भगवानदास रायकवार को पद्मश्री सम्मान से नवाजा जाएगा। श्री रायकवार ने बुंदेलखंड की उस पारंपरिक और ऐतिहासिक युद्ध कला (मार्शल आर्ट) को फिर से जीवित करने का भगीरथ प्रयास किया, जो आधुनिकता की चकाचौंध में धीरे-धीरे लुप्त होने की कगार पर पहुंच गई थी। उन्होंने न केवल स्वयं इस कठिन पारंपरिक युद्ध विधा का कड़ा अभ्यास जारी रखा, बल्कि अखाड़े के माध्यम से हजारों स्थानीय युवाओं को इसका निशुल्क प्रशिक्षण देकर अपनी माटी की संस्कृति और शौर्य परंपरा से जोड़ने का एक अद्भुत काम किया है। बुंदेलखंड की इस पारंपरिक कला को अब राष्ट्रीय फलक पर यह सर्वोच्च सम्मान मिलने से पूरे अंचल के कला प्रेमियों में भारी उत्साह देखा जा रहा है।