भोपाल। राजधानी भोपाल का सबसे व्यस्त और आधुनिक इलाका, रानी कमलापति रेलवे स्टेशन, हर रोज़ की तरह अपनी रफ़्तार से भाग रहा था। मुसाफिरों की चहल-पहल थी और बंसल वन बिल्डिंग के ऊँचे शीशों में शहर की गहमागहमी साफ़ दिख रही थी। लेकिन दोपहर के उस शांत पहर में अचानक फिजां बदल गई। काली वर्दी, नकाबपोश चेहरे और हाथों में अत्याधुनिक हथियार लिए NSG (नेशनल सिक्योरिटी गार्ड) के ब्लैक कैट कमांडोज ने पूरी बिल्डिंग को चारों तरफ से घेर लिया। पलक झपकते ही स्टेशन परिसर एक अभेद्य किले में तब्दील हो गया और वहां मौजूद लोगों के दिलों की धड़कनें एकाएक तेज हो गईं।
देखते ही देखते बंसल वन बिल्डिंग के हर कोने, गलियारे और छिपने लायक हर संकरी जगह पर कमांडोज तैनात हो गए। सड़कों पर पुलिस की गाड़ियों के सायरन गूँज रहे थे, फायर ब्रिगेड की गाड़ियां और एम्बुलेंस भी तैनात कर दी गई थीं। माहौल इतना गंभीर और तनावपूर्ण था कि आसपास मौजूद लोग बुरी तरह घबरा गए। किसी को कुछ समझ नहीं आ रहा था कि आखिर माजरा क्या है। हवा में एक ही सवाल तैर रहा था—"क्या शहर पर कोई बड़ा खतरा मंडरा रहा है?" लोगों की साँसें अटकी हुई थीं और हर कोई सहमी हुई नज़रों से उस 'सर्जिकल स्ट्राइक' जैसे मंजर को देख रहा था।
कमांडोज की फुर्ती और सटीक रणनीति को देखकर ऐसा लग रहा था मानो वे किसी बड़े मिशन को अंजाम दे रहे हों। कुछ ही देर में यह खबर पूरी बिल्डिंग में फैल गई कि यहाँ कुछ आतंकवादियों के छिपे होने की सूचना है और लोकल पुलिस के साथ तालमेल बिठाकर एनएसजी ने मोर्च संभाला है। बिल्डिंग के भीतर और बाहर जिस तरह से कमांडोज ने अपनी पोजीशन ली थी, वह किसी हॉलीवुड फिल्म के सीन जैसा लग रहा था। शहर के सबसे पॉश इलाके में हुई इस अचानक कार्रवाई ने पूरे भोपाल में हलचल मचा दी थी।
लेकिन, तनाव के उस चरम बिंदु के बीच जब आधिकारिक घोषणा हुई, तो लोगों ने राहत की एक लंबी सांस ली। अधिकारियों ने साफ किया कि यह कोई वास्तविक हमला नहीं, बल्कि NSG की एक हाई-प्रोफाइल 'मॉक ड्रिल' थी। एनएसजी के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि भोपाल में दो अलग-अलग स्थानों पर इस तरह का अभ्यास किया गया है। इसका उद्देश्य यह परखना था कि अगर कभी वास्तविक आतंकवादी संकट पैदा होता है, तो कमांडोज और लोकल पुलिस के बीच समन्वय कैसा रहेगा और परिस्थितियों को कितनी जल्दी नियंत्रण में लिया जा सकेगा।
अभ्यास खत्म होने के बाद एनएसजी के अधिकारियों ने साझा किया कि इस तरह की मॉक ड्रिल कमांडोज की ट्रेनिंग का एक अनिवार्य हिस्सा है। यह अभ्यास उन्हें हर समय, हर परिस्थिति और हर भौगोलिक स्थिति से निपटने के लिए मानसिक और शारीरिक रूप से तैयार रखता है। जब ब्लैक कैट कमांडोज अपनी ड्रिल पूरी कर वहां से रवाना हुए, तो लोगों के मन में डर की जगह गर्व के भाव थे। यह कहानी सिर्फ एक अभ्यास की नहीं थी, बल्कि इस भरोसे की थी कि देश की सुरक्षा करने वाले जांबाज हर पल मुस्तैद हैं ताकि भोपाल और पूरा देश चैन की नींद सो सके।

