टीकमगढ़, मोहसिन अहमद। नगर पालिका परिषद की आयोजित सम्मेलन बैठक भारी हंगामे और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच संपन्न हुई। बैठक की शुरुआत से लेकर देर शाम तक भाजपा और कांग्रेस पार्षदों के बीच तीखी बहस, नोकझोंक और विरोध का दौर चलता रहा। महिला पार्षदों के पतियों की बैठक में मौजूदगी, अध्यक्षता के अधिकार और विकास कार्यों में कथित भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों पर सदन कई बार गरमा गया।
बैठक शुरू होते ही कांग्रेस पार्षदों ने सम्मेलन की अध्यक्षता को लेकर आपत्ति जताई। विपक्ष ने मांग की कि बैठक का संचालन नगर पालिका उपाध्यक्ष द्वारा कराया जाए। इस पर भाजपा पार्षदों ने विरोध दर्ज कराया, जिससे सदन में हंगामे की स्थिति बन गई। विवाद बढ़ने पर सीएमओ ओमपाल सिंह भदौरिया ने स्पष्ट किया कि शासन के निर्देशानुसार डिप्टी कलेक्टर को अध्यक्ष का प्रभार सौंपा गया है, इसलिए नियमानुसार वही बैठक की अध्यक्षता करेंगे।
इसी दौरान महिला पार्षदों के पतियों की बैठक में मौजूदगी को लेकर भी विपक्ष ने कड़ा विरोध जताया। कांग्रेस पार्षदों ने इसे नियमों का उल्लंघन बताते हुए कहा कि जब जनता ने महिला प्रतिनिधियों को चुना है तो बैठकों में उनके पतियों का हस्तक्षेप उचित नहीं है। इस मुद्दे पर भी काफी देर तक सदन में बहसबाजी होती रही।
बैठक में शहर की विभिन्न कॉलोनियों में हो रहे निर्माण कार्यों को लेकर भी भ्रष्टाचार के आरोप लगाए गए। विपक्षी पार्षदों ने संबंधित कार्यों पर तत्काल रोक लगाने और पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की।
हालांकि भारी राजनीतिक तनाव के बीच नगर विकास से जुड़े प्रस्तावों पर चर्चा जारी रही। देर शाम तक चली बैठक में कुल 74 प्रस्तावों पर विचार किया गया, जिनमें से 70 विकास कार्यों को स्वीकृति प्रदान कर दी गई। स्वीकृत कार्यों में शहर के विभिन्न वार्डों में सीसी रोड, नाली और पुलिया निर्माण, स्टील रेलिंग लगाना, महिलाओं के लिए पिंक टॉयलेट निर्माण, पार्कों का सौंदर्यीकरण तथा ओपन जिम की स्थापना जैसे कार्य शामिल हैं। वहीं तकनीकी और विवादित कारणों से 4 प्रस्तावों को अगली बैठक तक स्थगित कर दिया गया।
नगर पालिका का यह सम्मेलन स्थानीय राजनीति में बढ़ती तल्खी को उजागर करता नजर आया। पार्षद पतियों की भूमिका और कॉलोनियों में निर्माण कार्यों को लेकर उठे सवाल आने वाले दिनों में नगर की राजनीति को और गर्मा सकते हैं। हालांकि शहरवासियों के लिए राहत की बात यह रही कि हंगामे के बावजूद करोड़ों रुपये के विकास कार्यों को मंजूरी मिल गई।

