वॉशिंगटन। वॉशिंगटन स्थित एक फेडरल अपील्स कोर्ट ने शुक्रवार को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन को व्हाइट हाउस में प्रस्तावित 40 करोड़ डॉलर के नए विशाल बॉलरूम के निर्माण कार्य को रोकने का आदेश दिया।

हालांक‍ि, कोर्ट ने प्रशासन को सुप्रीम कोर्ट में समीक्षा की अपील करने का मौका देने के लिए इस फैसले पर 14 दिनों के लिए रोक लगा दी।

डिस्ट्रिक्ट ऑफ कोलंबिया सर्किट के लिए अमेरिकी फेडरल अपील्स कोर्ट ने 2-1 के बहुमत से दिए गए फैसले में कहा, "हर राष्ट्रपति व्हाइट हाउस और उसके एग्जीक्यूटिव रेजिडेंस का स्थायी मालिक नहीं, बल्कि अस्थायी निवासी होता है। राष्ट्रपति के पास इस संपत्ति पर कोई संवैधानिक अधिकार नहीं है। यह परिसर वर्तमान और भविष्य के सभी राष्ट्रपतियों तथा अमेरिकी जनता के उपयोग के लिए बनाया और संरक्षित किया गया है।"

अदालत ने कहा, "अमेरिकी इतिहास में ऐसा कोई उदाहरण हमें नहीं मिला, जिसमें किसी राष्ट्रपति ने निजी तौर पर जुटाए गए धन का उपयोग करके व्हाइट हाउस के उन महत्वपूर्ण हिस्सों को एकतरफा ढंग से गिरा दिया हो, जिन्हें कांग्रेस ने बनाने की मंजूरी दी थी और जिनके लिए अमेरिकी करदाताओं ने भुगतान किया था। अब तक ऐसा कभी नहीं हुआ था।"

स‍िन्हुआ समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, अदालत ने नेशनल ट्रस्ट फॉर हिस्टोरिक प्रिजर्वेशन के पक्ष में फैसला सुनाया। फैसले में कहा गया कि अक्टूबर 2025 में सिर्फ तीन दिनों के भीतर ट्रंप ने विचार-विमर्श किए बिना और कांग्रेस की अनुमति हासिल किए बिना, व्हाइट हाउस के ईस्ट विंग को पूरी तरह ध्वस्त करवा दिया ताकि उसकी जगह 90,000 वर्ग फुट का एक विशाल बॉलरूम बनाया जा सके। यह परियोजना निजी फंड से वित्तपोषित थी और इस पर कांग्रेस की कोई निगरानी नहीं थी।

हालांकि अदालत ने अपने आदेश में यह भी जोड़ा, "इस फैसले पर चौदह दिनों की रोक लगा रहे हैं, ताकि प्रतिवादी यदि चाहे तो सुप्रीम कोर्ट में इसकी समीक्षा की मांग कर सकें।"

इससे पहले जुलाई में ट्रंप ने कहा था कि व्हाइट हाउस का पुनर्निर्माण और नवीनीकरण अमेरिका के व्यापक पुनर्जागरण का प्रतीक है। उनका तर्क था कि देश की सबसे पहचान वाली इमारत राष्ट्रीय शक्ति, इतिहास और आत्मविश्वास को दर्शानी चाहिए।

7 जुलाई को रोज गार्डन से दिए गए अपने संबोधन में ट्रंप ने व्हाइट हाउस के नवीनीकरण पर विस्तार से बात की थी। उन्होंने इसे केवल संरक्षण का प्रयास नहीं, बल्कि अमेरिका के भविष्य का प्रतीक भी बताया था। ट्रंप ने कहा था कि अमेरिका के पास ऐसी औपचारिक सुविधाएं होनी चाहिए जो दुनिया की अन्य बड़ी शक्तियों के बराबर या उनसे बेहतर हों।