नई दिल्ली। सऊदी अरब की प्रमुख ऊर्जा और अवसंरचना कंपनी अल्फानार ग्रुप भारत स्थित अपनी पवन टरबाइन विनिर्माण कंपनी सेनवियन में 10 करोड़ डॉलर (लगभग 830 करोड़ रुपए) का निवेश करने जा रही है। इस निवेश का उद्देश्य कंपनी के उत्पाद विकास को मजबूत करना, नई तकनीकों पर काम तेज करना और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में विस्तार को गति देना है।अरेबियन गल्फ बिजनेस इनसाइट के अनुसार, निवेश की पहली किस्त के रूप में 34 मिलियन डॉलर इस महीने जारी की जा चुकी है, जबकि शेष राशि अगले कुछ सप्ताह में स्थानांतरित किए जाने की उम्मीद है। यह पूंजी सेनवियन की दीर्घकालिक उत्पाद रणनीति, नई पवन ऊर्जा तकनीकों के विकास और वैश्विक परियोजना पाइपलाइन को मजबूत करने में इस्तेमाल की जाएगी।

अल्फानार ने वर्ष 2021 में जर्मनी की सेनवियन जीएमबीएच से सेनवियन का अधिग्रहण किया था। इसके बाद से सऊदी समूह ने भारतीय कंपनी को अपनी नवीकरणीय ऊर्जा रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बना दिया है।

सेनवियन के चेयरमैन और अल्फानार प्रोजेक्ट्स के अध्यक्ष जमाल वादी ने कहा कि भारत अल्फानार समूह की नवीकरणीय ऊर्जा रणनीति के केंद्र में है और सेनवियन पवन ऊर्जा क्षेत्र के लिए कंपनी की दीर्घकालिक दृष्टि का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है।

वर्तमान में सेनवियन की वार्षिक विनिर्माण क्षमता 1.5 गीगावाट है, जबकि इसकी परिचालन क्षमता 1.6 गीगावाट से अधिक हो चुकी है। ताजा निवेश से कंपनी की नई टरबाइन प्रौद्योगिकियों के विकास की क्षमता बढ़ेगी और भारतीय तथा वैश्विक दोनों बाजारों में नए अवसरों का लाभ उठाने में सहायता मिलेगी।

यह निवेश ऐसे समय में आया है जब भारत का पवन ऊर्जा क्षेत्र तेजी से विस्तार कर रहा है। नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, देश की स्थापित पवन ऊर्जा क्षमता 2014 के लगभग 21 गीगावाट से बढ़कर अब 58 गीगावाट से अधिक हो चुकी है।

भारत ने वर्ष 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित बिजली क्षमता हासिल करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है, जिससे पवन टरबाइन और अन्य नवीकरणीय ऊर्जा उपकरण निर्माताओं के लिए बड़े अवसर पैदा हो रहे हैं।

दूसरी ओर, सऊदी अरब भी अपनी विजन 2030 रणनीति के तहत नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में निवेश बढ़ा रहा है। वर्ष 2020 के बाद से देश की नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता लगभग हर साल दोगुनी हो रही है और पिछले वर्ष यह 12.3 गीगावाट तक पहुंच गई। हालांकि यह अभी भी सऊदी अरब के 2030 तक 130 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता के महत्वाकांक्षी लक्ष्य के दसवें हिस्से से भी कम है।