भोपाल। मध्यप्रदेश में लोक निर्माण विभाग (PWD) के विश्राम गृहों और सर्किट हाउस के कक्षों के आरक्षण को लेकर राज्य सरकार ने एक बड़ा नीतिगत बदलाव किया है। विभाग द्वारा जारी नए आदेश के तहत अब सर्किट हाउस और रेस्ट हाउस के कमरों के आवंटन की प्रक्रिया से कलेक्टर और एसडीएम को पूरी तरह बाहर कर दिया गया है। विभाग ने स्पष्ट रूप से आपत्ति जताई थी कि जिला प्रशासन के अधिकारियों द्वारा आरक्षण प्रक्रिया में किया जा रहा हस्तक्षेप विभागीय अधिकारों का अतिक्रमण है, जिससे प्रशासनिक समन्वय में बाधा उत्पन्न हो रही थी।
मंत्रालय द्वारा जारी इस नए आदेश में साफ किया गया है कि प्रदेश भर में स्थित विश्राम भवनों और विश्राम गृहों के कक्षों को आरक्षित करने का सर्वाधिकार अब केवल लोक निर्माण विभाग के अधिकृत अधिकारियों के पास ही सुरक्षित रहेगा। शासन ने इस व्यवस्था को तत्काल प्रभाव से पूरे प्रदेश में लागू कर दिया है। विभाग का तर्क है कि आरक्षण प्रक्रिया का संचालन तय नियमों के अनुसार होना चाहिए ताकि व्यवस्था में पारदर्शिता और स्पष्टता बनी रहे।
राजधानी भोपाल की व्यवस्था को लेकर आदेश में विशेष प्रावधान किए गए हैं। भोपाल स्थित महत्वपूर्ण विश्राम भवनों के आरक्षण की कमान अब राज्य सरकार के सत्कार अधिकारी के हाथों में होगी। हालांकि, भोपाल के सर्किट हाउस के कक्षों के आरक्षण की जिम्मेदारी अपवाद स्वरूप अभी भी कलेक्टर के पास ही रखी गई है। इसके अतिरिक्त, राजधानी के अन्य सभी रेस्ट हाउसों के प्रबंधन और आरक्षण का अधिकार लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता कार्यालय के मुख्य अभियंता को सौंपा गया है।
वहीं, जिलों और जमीनी स्तर पर बड़े बदलाव किए गए हैं। अब जिला मुख्यालयों, तहसील स्तर और उससे नीचे स्थित सभी विश्राम गृहों के कक्षों के आरक्षण का संपूर्ण अधिकार संबंधित जिले के कार्यपालन यंत्री (लोक निर्माण विभाग) के पास रहेगा। विभाग ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया है कि आरक्षण के लिए अन्य सभी पुरानी शर्तें और प्रक्रियाएं पहले की तरह ही लागू रहेंगी, केवल आरक्षण करने वाले प्राधिकारी की शक्तियों में यह बदलाव किया गया है।



