बालाघाट। मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले में आदिवासी बच्चों की मौत का मामला अब राष्ट्रीय राजनीति का केंद्र बन गया है। राहुल गांधी द्वारा मध्य प्रदेश सरकार पर निशाना साधे जाने के बाद 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने प्रभावित गांवों का दौरा किया। दौरे के बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर व्यंग्य के रूप में राज्यपाल मंगूभाई पटेल को संबोधित एक पत्र पोस्ट किया, जिसमें खुद को मप्र का मुख्यमंत्री बताते हुए अपने पद से इस्तीफा देने की बात कही। दीपके के इस कदम से प्रदेश की राजनीति गर्मा गई है, वहीं दूसरी ओर स्वास्थ्य विभाग ने आनन-फानन में जिले के लिए बड़े पैकेज की घोषणा कर दी है।
राज्यपाल को व्यंग्यात्मक पत्र और दूषित पानी का वीडियो वायरल
CJP संस्थापक अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया पर सरकार की नीतियों और योजनाओं पर तीखे सवाल खड़े किए: रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को टैग करते हुए जारी फर्जी 'इस्तीफे' में लिखा कि 30 से अधिक आदिवासी बच्चों की मौत के बाद उनका विवेक सीएम पद पर रहने की अनुमति नहीं देता। उन्होंने सरकार द्वारा मुआवजे की राशि 2 लाख से बढ़ाकर 4 लाख करने, ग्रामीण पेयजल व्यवस्था और 'हर घर नल योजना' की विफलता पर निशाना साधा।दीपके ने देर रात बालाघाट के एक गांव का वीडियो पोस्ट किया, जिसमें नल से गंदा और मटमैला पानी निकलता दिख रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या मंत्री या विधायक अपने बच्चों को ऐसा पानी पिलाएंगे?
भाजपा नेताओं का पलटवार— "बाहरी लोग बिगाड़ रहे माहौल"
दीपके के इस कदम के बाद भाजपा और सरकार के वरिष्ठ नेताओं ने उन पर हमला बोला: बालाघाट के प्रभारी एवं परिवहन मंत्री उदय प्रताप सिंह ने आरोप लगाया कि बाहरी लोग जिले में जाकर जानबूझकर माहौल खराब करने का काम कर रहे हैं। सबनानी ने कहा कि दीपके न तो सदन के सदस्य हैं और न ही मध्य प्रदेश इस तरह के मखौल उड़ाने का स्थान है।
स्वास्थ्य महकमा हुआ सक्रिय: बालाघाट को ₹2 करोड़ का पैकेज, 67 नए मेडिकल अफसर तैनात
मामले के तूल पकड़ने और CJP नेता के दौरे के बाद उप मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल ने भोपाल से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बालाघाट की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की उच्चस्तरीय समीक्षा की: जिले में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए ₹2 करोड़ की राशि तुरंत स्वीकृत की गई। साथ ही दो नए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC), एक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) और दो मोबाइल मेडिकल यूनिट (MMU) शुरू करने के निर्देश दिए गए। मैदानी अमले की कमी दूर करने के लिए जिले में 67 नए मेडिकल ऑफिसर्स की तुरंत पदस्थापना कर दी गई है। डिप्टी सीएम ने अधिकारियों को जन्मजात बीमारियों से पीड़ित बच्चों की पहचान कर तुरंत इलाज शुरू करने तथा लगातार मैदानी दौरे करने की हिदायत दी है।




