मंदसौर, ललित शंकर धाकड़। मंदसौर में शिक्षा का अधिकार कानून (RTE) के तहत निजी स्कूलों में प्रवेश नहीं मिलने से नाराज पालकों और बच्चों का गुस्सा सड़कों पर फूट पड़ा। बड़ी संख्या में अभिभावक अपने मासूम बच्चों के साथ जिला कलेक्टर कार्यालय पहुंचे और कड़कड़ाती धूप में धरने पर बैठ गए। नौतपा की भीषण गर्मी के बावजूद बच्चे अपने हक की मांग को लेकर धरना स्थल पर डटे रहे, जिससे यह मामला पूरे शहर में चर्चा का विषय बन गया।


धरने पर बैठे पालकों का आरोप है कि शिक्षा विभाग की लापरवाही के कारण जिन निजी विद्यालयों को RTE योजना के दायरे में नहीं होना चाहिए था, वे स्कूल पोर्टल पर प्रदर्शित हुए। इसके चलते लॉटरी प्रक्रिया में बच्चों का चयन हो गया, लेकिन बाद में स्कूल प्रबंधन ने प्रवेश देने से साफ इनकार कर दिया। अभिभावकों ने सवाल उठाया कि जब शासन की लॉटरी में बच्चों का नाम आया तो फिर एडमिशन क्यों नहीं दिया जा रहा है।


प्रदर्शन कर रहे पालकों ने प्रशासन पर बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने का आरोप लगाया। उनका कहना है कि गरीब और जरूरतमंद परिवारों के बच्चों को शिक्षा का अधिकार दिलाने के लिए बनाई गई योजना में ही गंभीर अनियमितताएं सामने आ रही हैं। वहीं दूसरी ओर, कलेक्टर कार्यालय के बाहर धरने पर बैठे बच्चों और पालकों को समझाने के लिए प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और समाधान का आश्वासन दिया, लेकिन अभिभावक ठोस कार्रवाई की मांग पर अड़े रहे।


भीषण गर्मी में मासूम बच्चों का धरने पर बैठना लोगों के बीच चिंता और चर्चा का विषय बना रहा। RTE प्रवेश विवाद को लेकर अब मंदसौर में प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं और मामले ने राजनीतिक तूल भी पकड़ लिया है।