सिवनी। मध्य प्रदेश के सिवनी जिले में खरीफ सीजन के दौरान यूरिया खाद की भारी किल्लत से किसानों की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। डुंडा स्थित मार्कफेड वेयरहाउस (खाद गोदाम) के बाहर पिछले कई दिनों से खाद लेने के लिए अन्नदाताओं की लंबी कतारें लगी हुई हैं। किसान सुबह 5 बजे से ही गोदाम के बाहर लाइन में लग जाते हैं, लेकिन घंटों इंतजार करने के बाद भी कई किसानों को यूरिया नहीं मिल पा रहा है और उन्हें देर शाम खाली हाथ ही घर लौटना पड़ रहा है।


जमीन पर दस्तावेज रखकर लगानी पड़ रही कतार, अव्यवस्था उजागर

खाद वितरण केंद्र पर भीड़ और अव्यवस्था का आलम यह है कि किसानों को अपनी बारी सुरक्षित रखने के लिए अनोखा और विवश करने वाला तरीका अपनाना पड़ रहा है। घंटों खड़े रहने में असमर्थ किसान पहचान पत्र, पंजीयन रसीदें और जरूरी दस्तावेज जमीन पर कतारबद्ध रखकर अपनी जगह का नंबर लगाते नजर आ रहे हैं। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो और तस्वीरें खाद वितरण प्रणाली की लचर व्यवस्था को साफ बयां कर रही हैं।


फसलों की बढ़वार के नाजुक दौर में यूरिया का संकट, किसानों में भारी रोष

किसानों का कहना है कि वर्तमान समय खरीफ फसलों की बढ़वार (वेजिटेटिव ग्रोथ) का सबसे महत्वपूर्ण चरण है। इस समय पौधों को यूरिया खाद की सख्त आवश्यकता होती है। यदि सही समय पर यूरिया नहीं डाला गया, तो फसलों की वृद्धि रुक जाएगी और पैदावार पर इसका सीधा नकारात्मक असर पड़ेगा। खाद की कमी और वितरण में हो रही देरी से किसानों में प्रशासन और संबंधित विभाग के खिलाफ गहरा आक्रोश पनप रहा है।


किसानों ने रखीं प्रमुख मांगें:

  • पर्याप्त आपूर्ति: डुंडा मार्कफेड वेयरहाउस और अन्य वितरण केंद्रों पर यूरिया की पर्याप्त खेप तुरंत उपलब्ध कराई जाए।
  • पारदर्शी और सुव्यवस्थित व्यवस्था: खाद वितरण के लिए टोकन या काउंटर व्यवस्था बेहतर की जाए ताकि किसानों को घंटों धक्का-मुक्की न करनी पड़े।
  • समयबद्ध उपलब्धता: फसलों की तात्कालिक जरूरत को देखते हुए बिना देरी के खाद की आपूर्ति सुनिश्चित की जाए।
  • कतारों से मुक्ति: बुजुर्ग व दूर-दराज से आए किसानों के लिए बैठने और सुगम वितरण के पुख्ता इंतजाम हों।


प्रशासन से किसानों ने मांग की है कि खाद के संकट को गंभीरता से लेते हुए तत्काल समाधान निकाला जाए, ताकि किसानों को खेती-किसानी छोड़कर सड़कों और गोदामों के चक्कर न काटने पड़ें।