भुवनेश्वर। शुक्रवार को सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और विपक्षी दल - बीजू जनता दल (बीजद) और कांग्रेस ने गुरुवार को पुरी में हुई रथ यात्रा के दौरान कथित कुप्रबंधन को लेकर एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाए।
शुक्रवार को मुख्य विपक्षी दल बीजद ने एक बार फिर राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए पुरी में विश्व प्रसिद्ध रथ यात्रा के संचालन में गंभीर चूक का आरोप लगाया।
बीजद की वरिष्ठ नेता प्रमिला मल्लिक ने कहा कि रथ यात्रा के दौरान हुई दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं से भगवान जगन्नाथ के अनगिनत भक्तों की भावनाएं आहत हुई हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पहंडी जुलूस के दौरान भगवान जगन्नाथ को पारंपरिक ताहिया (पुष्पों से बना पारंपरिक मुकुट) नहीं पहनाया गया था।
मल्लिक ने श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (एसजेटीए) के मुख्य प्रशासक अरबिंद कुमार पाधी के स्पष्टीकरण को 'दुर्भाग्यपूर्ण' बताया। उन्होंने इस दावे पर सवाल उठाया कि बारिश में भीगने के बाद भगवान जगन्नाथ का ताहिया हटा दिया गया था, और पूछा कि केवल भगवान जगन्नाथ का ही सिर का वस्त्र क्यों उतरा जबकि भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा के वस्त्र बरकरार रहे।
मल्लिक ने कहा कि करोड़ों उड़िया भक्तों के परम पूज्य भगवान जगन्नाथ को बिना ताहिया के नंदीघोष रथ पर ले जाया गया। राज्य सरकार को इस चूक के लिए करोड़ों जगन्नाथ भक्तों से माफी मांगनी चाहिए।
पार्टी ने रथ यात्रा के दौरान पुरी के मारीचिकोटे में अचानक भीड़ के कारण एक श्रद्धालु की मृत्यु पर भी सरकार की आलोचना की। मल्लिक ने आरोप लगाया कि सरकार ने श्रद्धालुओं की सुरक्षा की बजाय वीआईपी सुरक्षा को प्राथमिकता दी, जिसके कारण ये मौतें हुईं।
बीजद ने दावा किया कि 362 लोग घायल हुए हैं, जिनमें से 122 गंभीर रूप से घायल हैं। पार्टी ने प्रत्येक मृतक श्रद्धालु के परिवार के लिए 20 लाख रुपए के मुआवजे और घायलों के लिए गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा उपचार की मांग की।
ओडिशा प्रदेश कांग्रेस कमेटी (ओपीसीसी) के अध्यक्ष भक्त चरण दास ने भी आरोप लगाया कि सरकार ने पिछले तीन वर्षों से लगातार भगवान जगन्नाथ के प्रबंधन में गंभीर लापरवाही बरती है, जिससे देवता की पवित्रता और गरिमा को ठेस पहुंची है।
उन्होंने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि सरकार जनता की धार्मिक भावनाओं का सम्मान नहीं कर रही है।




