ईटानगर। मुख्यमंत्री पेमा खांडू की अध्यक्षता में अरुणाचल प्रदेश कैबिनेट ने शुक्रवार को 7,834 करोड़ रुपए के विकास कार्यों के लिए पैकेज को मंजूरी दी। इसके साथ ही गवर्नेंस, शिक्षा, इंफ्रास्ट्रक्चर और रोजगार से जुड़े सुधारों को भी मंजूरी दी गई, जिनका मकसद राज्य में लोगों के जीवन को आसान बनाना, बिजनेस को आसान बनाना और पब्लिक सर्विस डिलीवरी में सुधार करना है।

मुख्यमंत्री कार्यालय के एक वरिष्‍ठ अधिकारी ने बताया कि 2026-29 के लिए मुख्यमंत्री की चार प्रमुख योजनाओं (फ्लैगशिप स्कीम) के लिए निवेश को मंजूरी दी गई।

जिला मुख्यालयों, सब-डिविजनल मुख्यालयों और कैपिटल कॉम्प्लेक्स में कनेक्टिविटी बेहतर करने के लिए 'मुख्यमंत्री की व्यापक राज्य सड़क विकास योजना' (सीएमसीएसआरडीपी) के दूसरे चरण के लिए 2,334 करोड़ रुपए की राशि मंजूर की गई। अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि वे पहले चरण के तहत रुके हुए प्रोजेक्ट्स को मार्च 2027 तक पूरा करें।

कैबिनेट ने सीएमसीएसआरआरडीपी के लिए 2,000 करोड़ रुपए मंजूर किए, ताकि उन बस्तियों को हर मौसम में कनेक्टिविटी मिल सके जो प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) के दायरे में नहीं आती हैं।

'मुख्यमंत्री की व्यापक राज्य बिजली विकास कार्यक्रम' (सीएमसीएसपीडीपी) के तहत बिजली इंफ्रास्ट्रक्चर को आधुनिक बनाने और मार्च 2029 तक एग्रीगेट टेक्निकल एंड कमर्शियल (एटीएंडसी) नुकसान को घटाकर 18 प्रतिशत करने के लिए 2,000 करोड़ रुपए मंजूर किए गए।

'मिशन शिक्षित अरुणाचल' (2026-29) के दूसरे चरण के लिए 1,500 करोड़ रुपए मंजूर किए गए, ताकि स्कूल इंफ्रास्ट्रक्चर की कमियों को दूर किया जा सके, टीचर ट्रेनिंग को मजबूत किया जा सके, डिजिटल मॉनिटरिंग बढ़ाई जा सके और सीखने के नतीजों (लर्निंग आउटकम्स) में सुधार किया जा सके।

कुल 7,834 करोड़ रुपए के निवेश का मकसद अहम इंफ्रास्ट्रक्चर और शिक्षा से जुड़ी कमियों को दूर करने के लिए केंद्र और राज्य की योजनाओं को एक साथ लाना है। यह हाल के वर्षों में पेमा खांडू सरकार के सबसे बड़े पैकेजों में से एक है।

कैबिनेट ने सरकारी कर्मचारियों की भर्ती से लेकर रिटायरमेंट तक के पूरे लाइफसाइकिल को डिजिटाइज करने के लिए एआई-पावर्ड ई-एचआरएमएस 2.0 (मानव संपदा) प्लेटफ़ॉर्म लॉन्च किया और सभी विभागों को इसे तेजी से अपनाने का निर्देश दिया।

कैबिनेट ने नोटिफाइड सैनिक स्कूलों और राष्ट्रीय इंडियन मिलिट्री कॉलेज, देहरादून में पढ़ने वाले छात्रों की मदद के लिए मुख्यमंत्री फ्रंटियर सैनिक स्कूल स्कॉलरशिप स्कीम को मंजूरी दी।

इसने अरुणाचल के युवाओं को मिलिट्री संस्थानों में एडमिशन की तैयारी करने और आर्म्ड फोर्सेज में करियर बनाने में मदद करने के लिए इंडियन आर्मी के नेतृत्व वाले मेंटरशिप प्रोग्राम को भी मंजूरी दी।

एंटरप्रेन्योरशिप को बढ़ावा देने के लिए कैबिनेट ने एआरयूएन एमएसएमई मिशन को मंजूरी दी, जिसका मकसद हर साल 500 माइक्रो, स्मॉल और मीडियम एंटरप्राइज (एमएसएमई) को फिर से शुरू करना और अपग्रेड करना है। साथ ही मार्केट तक पहुंच, एक्सपोर्ट और क्षमता निर्माण में मदद करना है।

कैबिनेट से अरुणाचल ह्यूमन कैपिटल एंड इकोनॉमिक ट्रांसफॉर्मेशन विजन 2036 को भी मंजूरी दी गई, जिसका लक्ष्य 1 लाख युवाओं को स्किल ट्रेनिंग देना, 10,000 एंटरप्रेन्योर बनाना, 10,000 अप्रेंटिसशिप और विदेशी प्लेसमेंट की सुविधा देना, 100 इंडस्ट्री पार्टनरशिप बनाना और सभी 10 इंडस्ट्रियल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट (आईटीआई) को मॉडर्न स्किल हब में बदलना है।

रोजगार से जुड़े एक अहम फैसले में कैबिनेट ने अरुणाचल प्रदेश के रिटायर्ड अग्निवीरों के लिए पुलिस, आर्म्ड पुलिस बटालियन, फायर सर्विस, फॉरेस्ट डिपार्टमेंट, जेल और दूसरी यूनिफॉर्म वाली सेवाओं में कॉन्स्टेबल और उसके बराबर के पदों पर 20 प्रतिशत आरक्षण को मंजूरी दी।

कैबिनेट ने खेती और उससे जुड़े सेक्टर को मजबूत करने के लिए अरुणाचल प्रदेश एपिकल्चर एंड हनी पॉलिसी, 2026 को मंजूरी दी, जिसका मकसद वैज्ञानिक और कमर्शियल रूप से फायदेमंद मधुमक्खी पालन के जरिए राज्य को नॉर्थ-ईस्ट में शहद का प्रमुख उत्पादक बनाना है।

ईज ऑफ डूइंग बिजनेस (कारोबार में आसानी) को बेहतर बनाने के उपायों में खास कानूनी लाइसेंस वाले व्यवसायों को अलग से ट्रेड लाइसेंस लेने से छूट देना और 56 तरह के व्यवसायों के लिए रेगुलेटरी डुप्लीकेशन (नियमों की दोहरी प्रक्रिया) को खत्म करना शामिल है।

कैबिनेट ने सीएम केयर्स (मुख्यमंत्री का मजबूत, समान और स्वस्थ राज्य के लिए व्यापक एक्शन), मिशन सुरक्षा (नशीले पदार्थों, पदार्थों से होने वाले नुकसान और लत के खिलाफ राज्य का एकीकृत रिस्पॉन्स) और आयुष्मान आरोग्य शिविर-इंटेंसिफाइड 30 दिन के इंटीग्रेटेड हेल्थ कैंप के तहत हेल्थकेयर पहलों को भी मंजूरी दी।

अधिकारियों ने कहा कि सीएम केयर्स योजनाओं के तालमेल के जरिए हेल्थकेयर, सामाजिक सुरक्षा और नागरिकों की भलाई को मजबूत करेगा, जबकि मिशन सुरक्षा नशीले पदार्थों के दुरुपयोग के खिलाफ रोकथाम, इलाज, रिहैबिलिटेशन और कानून लागू करने की प्रक्रियाओं को एक साथ लाएगा।

कैबिनेट ने प्रधानमंत्री के टीबी मुक्त भारत के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए 'आयुष्मान आरोग्य शिविर' को मंजूरी दी है। यह 30 दिनों का राज्यव्यापी अभियान है जिसका मकसद स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच को बेहतर बनाना है। इसमें टीबी को खत्म करने पर खास जोर दिया जाएगा, जिसके लिए बड़े पैमाने पर जांच, शुरुआती पहचान और इलाज पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।