जबलपुर। राष्ट्रीय राजमार्ग-45 (NH-45) की बदहाली और क्षतिग्रस्त शाहपुरा रेलवे ओवरब्रिज (ROB) के बावजूद टोल वसूले जाने के मामले में जबलपुर हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। हाईकोर्ट की इस सख्ती के बाद भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने शाहपुरा टोल प्लाजा पर टोल दरों (यूजर फीस) में लगभग 70 प्रतिशत तक की भारी कटौती कर दी है।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश (ACJ) विवेक रूसिया और न्यायाधीश प्रदीप मित्तल की युगलपीठ ने एनएच-45 से जुड़ी जनहित याचिका पर अहम अंतरिम आदेश जारी करते हुए पुल की मरम्मत कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं।
जनहित याचिका और मामले की पृष्ठभूमि
400 करोड़ का पुल क्षतिग्रस्त: याचिका में बताया गया कि जबलपुर-भोपाल राष्ट्रीय राजमार्ग-45 पर लगभग 400 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित शाहपुरा ओवरब्रिज का एक हिस्सा बनने के महज तीन साल के भीतर ही ध्वस्त हो गया था।
जनता में आक्रोश: पुल टूटने और सड़क की बदहाली के बावजूद कई महीनों से पूरी दर से टोल वसूला जा रहा था, जिससे वाहन चालकों और स्थानीय जनता में गहरा आक्रोश था।
नोटिस जारी: हाईकोर्ट के संज्ञान लेने के बाद केंद्र सरकार, मध्य प्रदेश सरकार और NHAI से इस संबंध में जवाब-तलब किया गया था।
हाईकोर्ट के प्रमुख निर्णय और निर्देश
- टोल दरों में 70% कटौती का निर्णय रिकॉर्ड पर लिया: NHAI द्वारा 24 जून से टोल दरों में 70 प्रतिशत की कटौती किए जाने के कदम को कोर्ट ने रिकॉर्ड पर लिया।
- पूर्ण टोल माफी से इनकार: याचिकाकर्ता द्वारा टोल वसूली पूरी तरह बंद करने की मांग को कोर्ट ने खारिज कर दिया। अदालत ने तर्क दिया कि पूरे मार्ग में से केवल 4.8 किलोमीटर का हिस्सा ही डायवर्ट (पार पथ पर) है, जो पूर्ण टोल माफी का पर्याप्त आधार नहीं बनाता।
- मरम्मत कार्य में तेजी और विशेषज्ञों की राय: कोर्ट ने निर्देश दिया कि शाहपुरा ओवरब्रिज के जीर्णोद्धार और मरम्मत कार्य में तेजी लाने के लिए विशेषज्ञों की सलाह ली जाए और गुणवत्ता के साथ काम पूरा किया जाए।
- पौड़ी रेलवे गेट खोलने की मांग खारिज: सुरक्षा कारणों और तकनीकी बाधाओं का हवाला देते हुए कोर्ट ने पौड़ी रेलवे गेट को दोबारा खोलने से संबंधित मांग को भी ठुकरा दिया।





