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भारत-अमेरिका की नई साझेदारी, प्राइवेट सेक्टर के दम पर एआई क्षेत्र में आगे बढ़ने की तैयारी

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PeptechTime
22 फ़रवरी 2026, 06:46 am IST
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वॉशिंगटन। नई दिल्ली में आयोजित एआई इम्पैक्ट समिट में दुनिया के अलग-अलग कोने से दिग्गजों ने शिरकत की। इस बीच अमेरिका और भारत ने एक नई एआई साझेदारी पर मुहर लगाई है। दोनों देशों के बीच यह साझेदारी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की रेस में आगे रहने के लिए विकास और उद्यमिता को बढ़ावा देने वाले मॉडल का समर्थन करती है।

अमेरिका-भारत एआई अपॉर्चुनिटी पार्टनरशिप पर एक संयुक्त बयान के तहत दुनिया के दो सबसे बड़े लोकतंत्र ने रेगुलेटरी सिस्टम को एक जैसा करने, सेमीकंडक्टर और एनर्जी सप्लाई चेन को मजबूत करने और प्राइवेट-सेक्टर इनोवेशन को आगे बढ़ाने का वादा किया। इसका मकसद अगली टेक्नोलॉजिकल क्रांति को फॉलो करने के बजाय उसे आकार देना है। अमेरिका-भारत एआई अपॉर्चुनिटी पार्टनरशिप पैक्स सिलिका डिक्लेरेशन का एक बाइलेटरल एडिशन है।

दोनों सरकारों ने कहा कि वे अपने नवाचार पारिस्थितिकी तंत्रों के लिए एक साझा दृष्टि को स्वीकार करती हैं और इस समझौते को 21वीं सदी के लिए अमेरिका–भारत व्यापक वैश्विक सामरिक साझेदारी तथा भारत–अमेरिका कॉम्पैक्ट (सैन्य साझेदारी और त्वरित वाणिज्य एवं प्रौद्योगिकी के अवसरों को उत्प्रेरित करने) से जोड़ती हैं।

दोनों पक्षों ने कहा कि एआई का भविष्य “विश्वसनीय सहयोग, आर्थिक सुरक्षा और मुक्त उद्यम की नींव” पर आधारित होना चाहिए।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘ट्रांसफॉर्मिंग द रिलेशनशिप यूटिलाइजिंग स्ट्रैटजिक टेक्नोलॉजीज’ (टीआरयूएसटी) पहल के तहत बताए गए विजन को दोहराते हुए बयान में कहा गया कि दोनों देशों का मकसद भय से उपजे गतिरोध से आगे बढ़कर, एआई के अवसरों की गतिशीलता को अपनाना है, ताकि नवाचार को बढ़ावा दिया जा सके और उसे मानव कल्याण के लिए उपयोग में लाया जा सके।”

दोनों पक्षों का मानना ​​है कि आजाद दुनिया के सामने एक बड़ा रिस्क एआई की तरक्की नहीं, बल्कि इसे लीड करने में नाकामी है। दोनों पक्ष ऐसे रेगुलेटरी सिस्टम को अपनाने और मेनस्ट्रीम करने का वादा करते हैं जो तकनीकी नवाचार को आगे बढ़ाते हैं और निवेश को बढ़ावा देते हैं। उनका मकसद एक ऐसा ग्रोथ-प्रो-रेगुलेटरी माहौल बनाना है जो एआई नवाचार को बढ़ावा दे और बिल्डर्स, कोडर, क्रिएटर्स, स्टार्टअप्स और उन प्लेटफॉर्म्स को मजबूत बनाए जो उन्हें, दोनों देशों में, सुरक्षित और भरोसेमंद एआई इकोसिस्टम बनाने के लिए तेजी से टेस्ट, डिप्लॉय और स्केल करने में मदद करते हैं।

यह पार्टनरशिप फिजिकल एआई स्टैक को मजबूत करने पर फोकस करती है। बयान के अनुसार, भारत और अमेरिका पैक्स सिलिका ढांचे के तहत अपना सहयोग और मजबूत करेंगे। दोनों देश मिलकर शोध और विकास परियोजनाएं शुरू करेंगे, जिनका उद्देश्य भरोसेमंद ऊर्जा ढांचे का विस्तार करना, महत्वपूर्ण खनिजों का उत्पादन बढ़ाना, कुशल कामगारों की क्षमता का बेहतर उपयोग करना और विश्वसनीय सेमीकंडक्टर प्रणाली के विकास को तेज करना होगा।

दोनों देशों ने “ड्राइविंग फ्री एंटरप्राइज” पर भी जोर दिया। दोनों सरकारें चाहती हैं कि एआई की क्रांति को निजी क्षेत्र आगे बढ़ाए। इसके लिए वे देशों के बीच निवेश (वेंचर कैपिटल) को आसान बनाएंगे , शोध और विकास में साझेदारी बढ़ाएंगे, नई पीढ़ी के डेटा सेंटर में निवेश को प्रोत्साहित करेंगे, एआई के लिए कंप्यूटिंग क्षमता और प्रोसेसर के विकास व उपलब्धता में सहयोग करेंगे और एआई मॉडल व उनके उपयोग में नए नवाचार को बढ़ावा देंगे।

बयान में कहा गया कि यह साझेदारी एक नए दौर की शुरुआत है। दुनिया के सबसे पुराने और सबसे बड़े लोकतंत्र अब सिर्फ आजादी की रक्षा के लिए ही नहीं, बल्कि अपने लोगों की समृद्धि और आपसी सद्भाव के लिए भी साथ काम करेंगे। दोनों देशों का लक्ष्य एक ऐसा एआई भविष्य बनाने का है, जो उनके नागरिकों के काम आए, उनकी अर्थव्यवस्था और समाज को मजबूत करे। साथ ही आजादी, खुलापन और कानून के राज जैसे साझा मूल्यों को आगे बढ़ाए।

यह घोषणा ऐसे समय में हुई है जब दुनियाभर में एआई के नियम-कानून, सेमीकंडक्टर की सप्लाई चेन और महत्वपूर्ण खनिजों की सुरक्षा को लेकर बहस तेज हो रही है।

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