भोपाल, पंकज यादव। हम अक्सर सुनते हैं कि एक कलेक्टर बहुत शक्तिशाली होता है और अगर वह चाह ले तो अपने कामों से लाखों लोगों के जीवन को बदल सकता है।ठीक ऐसा ही काम एमपी के एक आईएएस अधिकारी ने कर दिखाया है। इस खास रिपोर्ट में हम जानेंगे कि आखिर कैसे एक कलेक्टर की योजना को न सिर्फ प्रधानमंत्री मोदी और यूनिसेफ ने सराहा बल्कि मप्र सरकार ने उस योजना को पूरे एमपी में ही लागू कर दिया है।
इन काबिल आईएएस अधिकारी का नाम है शीलेंद्र सिंह...। भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी शीलेंद्र सिंह ने अपनी दूरदर्शी सोच और प्रशासनिक दृढ़ता से मध्य प्रदेश के ग्रामीण अंचलों में स्वच्छता और महिला सशक्तिकरण की एक ऐसी नई इबारत लिख दी है, जिसकी गूंज अब पूरे देश में सुनाई दे रही है।
'स्वच्छता साथी: वॉश ऑन व्हील्स' मॉडल का उदय
छिंदवाड़ा में कलेक्टर रहते हुए शीलेंद्र सिंह द्वारा शुरू की गई स्वच्छता साथी: वॉश ऑन व्हील्स सेवा आज ग्रामीण भारत में स्वच्छता का सबसे प्रभावी और अनुकरणीय मॉडल बनकर उभरी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छ भारत संकल्प और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के स्वच्छ एवं समृद्ध मध्य प्रदेश के विजन को धरातल पर उतारने वाले आईएएस शीलेंद्र सिंह ने इस अभिनव प्रयोग के जरिए न सिर्फ गांवों के शौचालयों की तस्वीर बदली, बल्कि स्वच्छता कर्मियों और ग्रामीण महिलाओं को समाज में एक बेहद सम्मानजनक रोजगार और नई पहचान भी दिलाई है।
यूनिसेफ भी हुआ मुरीद, राष्ट्रीय डॉक्यूमेंट्री में मिली जगह
उनके इस बेहतरीन मॉडल की अभूतपूर्व सफलता को देखते हुए मध्य प्रदेश सरकार ने इसे पूरे प्रदेश में लागू कर दिया है, वहीं यूनिसेफ इंडिया ने भी इस नवाचार को मध्य प्रदेश के प्रतिनिधि मॉडल के रूप में चयनित कर अपनी राष्ट्रीय डॉक्यूमेंट्री में शामिल किया है, जो इस प्रयास की वैचारिक परिपक्वता और सामाजिक गहराई का सबसे बड़ा प्रमाण है।
योजना की शुरुआत और मुख्य उद्देश्य
आईएएस शीलेंद्र सिंह के इस क्रांतिकारी विजन की शुरुआत 26 सितंबर 2024 को छिंदवाड़ा जिले की ग्राम पंचायत छिंदी से हुई थी, जहां प्रदेश के राज्यपाल मंगूभाई पटेल ने इस अनूठी सेवा का औपचारिक शुभारंभ किया था। इस सेवा का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित स्कूल, आंगनवाड़ी, ग्राम पंचायत भवन, स्वास्थ्य केंद्र, छात्रावास जैसे संस्थागत शौचालयों के साथ-साथ व्यक्तिगत शौचालयों को पूरी तरह स्वच्छ, उपयोगी और जीवाणुमुक्त बनाना है, ताकि स्वच्छ भारत मिशन फेज-2 के तहत गांवों में ओडीएफ और ओडीएफ प्लस की निरंतरता को हमेशा बनाए रखा जा सके।
डिजिटल समाधान: मोबाइल ऐप और ऑनलाइन बुकिंग
आम तौर पर ग्रामीण क्षेत्रों में आधुनिक संसाधनों की कमी के कारण शौचालयों का रख-रखाव एक बड़ी चुनौती होता था, लेकिन शीलेंद्र सिंह ने इस समस्या के वैज्ञानिक समाधान के रूप में वॉश ऑन व्हील्स की परिकल्पना की। इस मॉडल के तहत एक विशेष मोबाइल ऐप भी तैयार किया गया है, जिसकी मदद से ग्रामीण क्षेत्र का कोई भी नागरिक या संस्था घर बैठे ही बेहद आसान तरीके से शौचालय की सफाई के लिए ऑनलाइन बुकिंग कर सकती है।
स्वच्छता साथियों को आधुनिक किट और वाहनों की सुविधा
इस पूरी योजना को अमलीजामा पहनाने के लिए आईएएस शीलेंद्र सिंह ने जिला पंचायत के माध्यम से स्वच्छता के क्षेत्र में काम करने के इच्छुक स्थानीय युवाओं और महिलाओं को जोड़कर उन्हें स्वच्छता साथी के रूप में तैयार किया। इस पूरी अवधारणा की सबसे खास बात यह है कि प्रशासन द्वारा इन स्वच्छता साथियों को आवागमन के लिए दोपहिया वाहन उपलब्ध कराए जाते हैं। इसके साथ ही उनकी सेहत और सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए उन्हें आधुनिक इलेक्ट्रिक व बैटरी ऑपरेटेड प्रेशर वॉशर मशीनें, विशेष स्वच्छता किट और व्यक्तिगत सुरक्षा किट जिसमें हेलमेट, चश्मा, मास्क, ग्लब्स, पीपीई किट और गमबूट शामिल हैं, दी जाती हैं।
यह स्वच्छता साथी अपने क्लस्टर मुख्यालय से 5 किलोमीटर के दायरे में 200 रुपये प्रति शौचालय यूनिट और 5 किलोमीटर से अधिक की दूरी होने पर 250 रुपये प्रति शौचालय यूनिट का बेहद नॉमिनल सफाई शुल्क लेते हैं। इस पूरी व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए राजस्व, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, शिक्षा, महिला एवं बाल विकास और स्वास्थ्य विभाग की टीमें आपसी तालमेल और टीमवर्क के साथ काम करती हैं, जिससे स्वच्छता साथियों को एक स्थायी और गरिमापूर्ण आमदनी का जरिया मिल गया है।
आईएएस शीलेंद्र सिंह की इस मुहिम ने ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाकर गांवों में नारी शक्ति वंदन के संकल्प को सच कर दिखाया है। इस योजना से जुड़कर छिंदवाड़ा जिले के 11 जनपदों की सैकड़ों महिलाओं ने रूढ़िवादी सोच को पीछे छोड़ते हुए नेतृत्व संभाला है और अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत किया है। इसका सबसे बेहतरीन उदाहरण धनोरा की अनामिका बेलवंशी जी हैं, जिन्होंने महज 7 महीनों में 2,10,000 रुपये की शानदार कमाई की है, वहीं छिंदी की खिमिया सरेयाम ने भी सिर्फ 2 महीने के भीतर 40,000 रुपये से अधिक की आमदनी कर यह साबित कर दिया है कि अगर सही अवसर और प्रशासनिक सहयोग मिले तो गांवों की बेटियां भी हर क्षेत्र में नेतृत्व कर सकती हैं।
सामाजिक बदलाव की अटूट मिसाल
यह अनूठी सेवा आज केवल एक स्वच्छता अभियान नहीं रह गई है, बल्कि यह नारी गरिमा, स्वावलंबन और सामाजिक बदलाव की एक ऐसी अटूट मिसाल बन चुकी है, जिसके सूत्रधार बने आईएएस शीलेंद्र सिंह आज मध्य प्रदेश में प्रशासनिक नवाचार के एक बड़े रोल मॉडल बनकर उभरे हैं।



