छतरपुर। बुंदेलखंड विरासत बचाओ मंच द्वारा जिला मुख्यालय पर महाराजा छत्रसाल की जयंती पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाई गई। संस्थापक पीएस बुंदेला के निर्देशन में आयोजित इस कार्यक्रम के तहत मंच के युवाओं ने शहर के डॉकखाना चौराहा पहुंचकर महाराजा छत्रसाल की प्रतिमा का विधिवत पूजन किया और माल्यार्पण कर उन्हें नमन किया।
मंच के जिलाध्यक्ष मानवेंद्र सिंह बुंदेला ने बताया कि यह जयंती केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि बुंदेलखंड के गौरवशाली इतिहास, संस्कृति और स्वाभिमान को याद करने का अवसर है। उन्होंने कहा कि महाराजा छत्रसाल ने मुगल शासक औरंगजेब के खिलाफ संघर्ष करते हुए बुंदेलखंड में स्वतंत्र राज्य की स्थापना की थी। उनका जीवन पराक्रम, संगठन क्षमता और अदम्य साहस का प्रतीक रहा है। महाराजा छत्रसाल बुंदेला वंश में जन्मे थे और ओरछा के रुद्र प्रताप सिंह के वंशज थे। उन्होंने अपने जीवनकाल में मुगलों की सत्ता को चुनौती देते हुए बुंदेलखंड को स्वतंत्र पहचान दिलाई। यही कारण है कि उन्हें 'बुंदेलखंड केसरीÓ के नाम से भी जाना जाता है। उनके आदर्श आज भी युवाओं को राष्ट्रभक्ति और संघर्ष की प्रेरणा देते हैं। कार्यक्रम के दौरान उपस्थित लोगों ने महाराजा छत्रसाल के जीवन और योगदान को याद करते हुए उनके पदचिन्हों पर चलने का संकल्प लिया। इस मौके पर जिला उपाध्यक्ष ब्रजेंद्र बुंदेला, राजकुमार यादव, सहसचिव अनिमेष यादव, निखिल शुक्ला, अभिषेक द्विवेदी, अमित पटेल, प्रतीक तिवारी सहित अन्य कार्यकर्ता मौजूद रहे।
शहर के प्रमुख चौराहे पर स्थित महाराजा छत्रसाल की प्रतिमा पर माल्यार्पण करने पहुंचे विरासत बचाओ मंच के जिलाध्यक्ष ने आसपास फैली गंदगी पर नाराजगी जताई। उन्होंने नगर पालिका को तत्काल सूचना दी, जिसके बाद सफाई कराई गई। मंच के कार्यकर्ताओं ने बताया कि, नियमित साफ-सफाई न होने से प्रतिमा स्थल के आसपास कचरा जमा हो गया था। उन्होंने यहां नियमित सफाई व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की। साथ ही प्रतिमा के आसपास होर्डिंग्स और बैनर लगाने का विरोध करते हुए इसे विरासत स्थल की गरिमा के खिलाफ बताया।

