भोपाल, जीतेन्द्र यादव। देश और मध्य प्रदेश में डीजल-पेट्रोल की लगातार बढ़ती कीमतों को लेकर सियासत एक बार फिर गरमा गई है। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता कमलनाथ ने ईंधन के बढ़ते दामों को लेकर केंद्र और राज्य सरकार पर सीधा हमला बोला है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (ट्विटर) पर एक के बाद एक तीखे ट्वीट करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि सरकार अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों और कच्चे तेल की कीमतों का बहाना बनाकर आम जनता की जेब पर डाका डाल रही है और उनसे भारी लूट की जा रही है। कमलनाथ ने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि सरकार वर्तमान में प्रति लीटर डीजल और पेट्रोल पर करीब 30 रुपये तक का भारी-भरकम टैक्स (उत्पाद शुल्क और वैट) वसूल रही है, जिसके कारण महंगाई की मार झेल रही जनता पर आर्थिक बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है।


पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने सरकार के साथ-साथ देश की बड़ी पेट्रोलियम कंपनियों की कार्यप्रणाली और उनके बेतहाशा मुनाफे पर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि सरकारी और निजी पेट्रोलियम कंपनियों ने पिछले वर्षों के दौरान आम उपभोक्ताओं की गाढ़ी कमाई से लाखों-करोड़ों रुपये का शुद्ध मुनाफा कमाया है। कंपनियों के वित्तीय नतीजों का जिक्र करते हुए उन्होंने दावा किया कि पिछली तिमाही में ही इन पेट्रोलियम कंपनियों का मुनाफा 28 फीसदी से लेकर 78 प्रतिशत तक बढ़ गया है। कमलनाथ ने इस नीति को पूरी तरह जनविरोधी बताते हुए कहा कि जब वैश्विक बाजार में कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) के दाम कम होते हैं, तब सरकार और कंपनियां उसका सीधा फायदा देश की जनता को नहीं देतीं और टैक्स बढ़ाकर मुनाफाखोरी में जुट जाती हैं, लेकिन जैसे ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में दाम थोड़े से भी बढ़ते हैं, उसका पूरा का पूरा बोझ तत्काल आम उपभोक्ताओं पर डाल दिया जाता है।


वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने जनता को इस भारी किल्लत से निजात दिलाने के लिए सरकार और कंपनियों को नसीहत भी दी है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि सरकार डीजल-पेट्रोल पर लगाए जा रहे भारी टैक्स में कटौती करे और पेट्रोलियम कंपनियां अपने मुनाफे के हिस्से को थोड़ा कम करें, तो आम नागरिकों को बढ़ती महंगाई से बहुत बड़ी राहत मिल सकती है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि वह कच्चे तेल की कीमतों के नाम पर बहानेबाजी बंद करे और टैक्स की दरों को कम कर जनता को तत्काल प्रभाव से सस्ती दरों पर ईंधन उपलब्ध कराए। फिलहाल, पूर्व मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद मध्य प्रदेश के राजनैतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हैं और विपक्ष इस मुद्दे को लेकर सरकार को घेरने की रणनीति बना रहा है।