छतरपुर। केन-बेतवा लिंक परियोजना के तहत निर्मित होने वाले ढोड़न बांध के डूब क्षेत्र और प्रभावित गांवों में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए जिला प्रशासन ने सख्त कदम उठाया है। जिला मजिस्ट्रेट पार्थ जैसवाल ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता-2023 की धारा-163 (पूर्ववर्ती धारा 144) के तहत प्रतिबंधात्मक आदेश जारी कर दिए हैं। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है, जिसका मुख्य उद्देश्य बांध निर्माण कार्य में संभावित बाधाओं को रोकना और क्षेत्र में शांति व्यवस्था बनाए रखना है। प्रशासन को आशंका है कि कुछ असमाजिक तत्व अवांछनीय गतिविधियों के जरिए जनसामान्य के जानमाल और लोकशांति को खतरा पैदा कर सकते हैं।


इन गांवों और तहसीलों में रहेगा प्रतिबंध

जारी आदेश के अनुसार, तहसील सटई के अंतर्गत आने वाले ग्राम ढोड़न, खरयानी, पलकौहा, सुकवाहा, भोरखुवा, घुघरी और तहसील बिजावर के ग्राम कुपी, शहपुरा, बसुधा, नैगुवां, ककरा, पाठापुर, डुगरिया, कदवारा सहित इन गांवों की सीमाओं से लगे अन्य क्षेत्रों में पाबंदियां लागू रहेंगी। इसके अलावा तहसील मुख्यालय बिजावर, सटई और छतरपुर नगर की सीमा में भी शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए विशेष नजर रखी जा रही है। इन क्षेत्रों में पांच या पांच से अधिक व्यक्तियों के अनावश्यक रूप से एकत्रित होने पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है।


बाहरी व्यक्तियों के लिए 'एग्जिट' ऑर्डर और सत्यापन की शर्त

आदेश का सबसे कड़ा पहलू उन लोगों के लिए है जो इन गांवों के मूल निवासी नहीं हैं। जिला मजिस्ट्रेट ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि ऐसे समस्त व्यक्ति जो दूसरे जिलों या गांवों से आकर यहां रह रहे हैं, वे तत्काल प्रभाव से इन ग्रामों, सटई, बिजावर नगर और संपूर्ण जिले की सीमा को छोड़कर चले जाएं। यदि कोई बाहरी व्यक्ति किसी विशेष कारण से रुका हुआ है, तो उसकी जानकारी संबंधित पुलिस थाने में देना अनिवार्य होगा ताकि पुलिस उनका सत्यापन कर सके। बांध कार्यस्थल पर केवल अधिकृत अधिकारियों और कर्मचारियों को ही प्रवेश की अनुमति होगी।


बिना अनुमति सभा, जुलूस और प्रदर्शन पर रोक

आगामी दो महीनों तक प्रभावी रहने वाले इस आदेश के तहत, प्रभावित क्षेत्रों में किसी भी प्रकार की आमसभा, जुलूस या प्रदर्शन का आयोजन बिना अनुविभागीय दण्डाधिकारी (SDM) की लिखित अनुमति के नहीं किया जा सकेगा। प्रशासन का मानना है कि बांध प्रभावित क्षेत्रों में अनावश्यक भीड़ जुटने से भय और अशांति का वातावरण निर्मित हो सकता है, जिससे मानव जीवन और लोकसंपत्ति को क्षति पहुँचने का संकट है। यह आदेश 6 अप्रैल 2026 से आगामी दो माह की अवधि के लिए एकपक्षीय रूप से पारित किया गया है।


उल्लंघन करने पर होगी जेल और कानूनी कार्रवाई

जिला मजिस्ट्रेट ने चेतावनी दी है कि यदि कोई भी व्यक्ति उपर्युक्त प्रतिबंधात्मक आदेश का उल्लंघन करता पाया गया, तो उसके विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (BNS) के प्रावधानों के तहत कड़ी अभियोजन की कार्यवाही की जाएगी। आदेश का उल्लंघन धारा 223 के अंतर्गत दंडनीय अपराध की श्रेणी में आएगा। हालांकि, अत्यंत विशेष परिस्थितियों में प्रभावित व्यक्ति जिला मजिस्ट्रेट के न्यायालय में आवेदन प्रस्तुत कर शर्तों में छूट की मांग कर सकेगा, जिस पर गुण-दोष के आधार पर विचार किया जाएगा।