उमरिया। उमरिया जिले में पिछले कई दिनों से हो रही रुक-रुककर बारिश का व्यापक असर अब जलस्रोतों पर स्पष्ट दिखाई देने लगा है। जोहिला डैम में जलस्तर में हुई लगातार वृद्धि के बाद रविवार को बांध प्रबंधन ने एक साथ पांच गेट खोल दिए। गेट खुलते ही बांध से छूटते पानी का विहंगम और तेज बहाव देखने को मिला। इस मनमोहक नजारे की खबर जैसे ही फैली, आसपास के इलाकों से बड़ी संख्या में लोग इस अद्भुत दृश्य को देखने के लिए जोहिला डैम पहुँचने लगे।


कुल 12 मीटर तक खोले गए पांचों गेट

जोहिला बांध प्रबंधन से मिली आधिकारिक जानकारी के अनुसार, कैचमेंट एरिया से पानी की लगातार हो रही आवक को संतुलित करने के लिए गेट नंबर 2 को 2 मीटर, गेट नंबर 3 को 3 मीटर, गेट नंबर 4 को 3 मीटर, गेट नंबर 5 को 2 मीटर और गेट नंबर 6 को 2 मीटर तक खोला गया है। इस प्रकार पांचों गेटों को मिलाकर कुल 12 मीटर तक पानी की नियंत्रित निकासी की जा रही है। बारिश के इस मौजूदा सीजन में यह पहला मौका है जब जोहिला डैम के पांच गेट एक साथ खोले गए हैं।


अद्भुत नजारे को देखने पहुँच रहे लोग, सुरक्षा व्यवस्था पुख्ता

डैम के पांचों गेटों से तीव्र गति से बहते जलप्रपात जैसे नजारे को देखने पहुँचे स्थानीय निवासी शिवम गुप्ता और माला गुप्ता ने बताया कि एक साथ पांच गेटों से पानी के इस रौद्र और आकर्षक रूप को देखना बेहद ही अद्भुत अनुभव है। बढ़ती भीड़ को देखते हुए प्रशासन और बांध प्रबंधन ने सुरक्षा व्यवस्था सख्त कर दी है। किसी भी अप्रिय घटना से बचाव के लिए डैम परिसर और पानी के समीप जाने वाले रास्तों पर सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गई है। प्रशासन ने आम नागरिकों और पर्यटकों से पानी के तेज बहाव वाले संवेदनशील क्षेत्रों से दूर रहने की अपील की है।


जिले में अब तक 514.2 मिमी बारिश दर्ज

भू-अभिलेख अधीक्षक से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, पिछले 24 घंटों में जिले में औसतन 10.9 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई है, जिसमें मानपुर तहसील में सर्वाधिक 38.6 मिमी बारिश हुई है। वहीं पाली में 10.8, नौरोजाबाद में 7.2, चंदिया में 7.1, बांधवगढ़ में 5.7, करकेली में 4.9 और बिलासपुर में 1.2 मिमी बारिश हुई। इस वर्ष 1 जून से 9 अगस्त तक जिले में कुल 514.2 मिलीमीटर औसत बारिश दर्ज की जा चुकी है। हालांकि यह आंकड़ा पिछले वर्ष इसी अवधि में हुई 846.4 मिमी बारिश की तुलना में कम है, लेकिन लगातार हो रही रिमझिम और मूसलाधार बारिश से जोहिला डैम में पानी की आवक बनी हुई है, जिसके चलते गेट खोलकर जलस्तर को नियंत्रित किया जा रहा है।